Nitish Kumar: ‘साफ-सुथरी छवि’ वाला नेता जो PM बनने से चूका, जानें क्यों सीएम बनकर ही करना पड़ रहा है संतोष

जनता दल (यू) के सुप्रीमो Nitish Kumar वाकई किस्मत के धनी हैं। अपनी कुंडली में वह राजयोग लिखा कर लाए हैं। राजनीति हर किसी को रास नहीं आती, मगर जिसे रास आती है, वह किस्मत वाला माना जाता है। राजनीति में कोई पूरी जिंदगी खपा देता है, मगर विधायक या सांसद बनना तो दूर ग्राम प्रधान या पार्षद तक नहीं बन पाता है। उसे सिर्फ पार्टी में विभिन्न पदों की जिम्मेदारी संभाल कर संतोष करना पड़ता है।

दूसरी तरफ नीतीश कुमार जैसे राजनेता होते हैं, जो निरंतर राजयोग का सुख भोगते रहते हैं। देश में जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आदि कई राजनेता ऐसे हैं, जिनकी कुंडली में राजयोग है। सुशासन बाबू यानी नीतीश कुमार का प्रधानमंत्री बनने का सपना बेशक पूरा नहीं हो पाया, मगर सीएम के तौर पर वह अनोखा रिकॉर्ड कायम करने की तरफ अग्रसर नजर आते हैं। बिहार में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर वह चर्चाओं में हैं।

दसवीं बार संभाला सीएम पद

पिछले बीस साल में उन्होंने दसवीं बार सीएम पद का दायित्व संभाला है। इस अवधि में लगभग अट्ठारह साल तक वह सीएम रह चुके हैं। यदि अगले छह साल तक वह यह जिम्मेदारी निभाते रहते हैं तो उनके नाम ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा। वह देश में ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन जाएंगे, जो सबसे अधिक बार यह दायित्व संभालेंगे। हालांकि राजनीति का कोई भरोसा नहीं होता। कौन कब अर्श से फर्श पर और फर्श से अर्श पर पहुंच जाएगा, कोई नहीं जानता। राजनीति में छवि का विशेष महत्व होता है।

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साफ-सुथरी छवि के राजनेता कम मिलते हैं। नीतीश कुमार ने अपने दामन को अब तक पाक-साफ रखा है। विरोधी भी उनकी ईमानदारी को सहर्ष स्वीकार करते रहे हैं। देश की राजनीति में आपराधिक छवि के नेताओं की भरमार है। संसद से लेकर राज्यों की विधानसभाओं तक में दागी छवि के जनप्रतिनिधियों की कोई कमी नहीं है।

अभी सुशासन बाबू को कई वादे पूरे करने बाकी

बिहार में सुशासन बाबू ने नई पारी भले ही शुरू कर दी है, मगर उनके समक्ष चुनौतियां कम नहीं हैं। चुनाव के दौरान जनता से किए वादों को उन्हें पूरा करना होगा। प्रमुख सहयोगी भाजपा संग तालमेल बैठाकर काम करना पड़ेगा। विकास कार्यों को गति देने के साथ अपराधियों और बाहुबली नेताओं से निपटने की भी चुनौती रहेगी।

विधानसभा चुनाव के दौरान जेडीयू और भाजपा ने राजद के शासनकाल पर तंज कसने के लिए जंगलराज के नारे को जमकर उछाला था। नई सरकार को इस बात का ध्यान रखना होगा कि राज्य में जंगलराज की वापसी न होने पाए। नए सदन में कांग्रेस और राजद जैसे विरोधी दलों के सदस्यों की बेशक कम है, मगर सरकार के कामकाज में अड़ंगा डालने का वह कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।

इन दोनों दलों की हालत हमले में घायल शिकारी जैसी हो चुकी है। सरकार को परेशान करने का कोई न कोई मौका वह ढूंढते रहेंगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि Nitish Kumar के नेतृत्व में बिहार को आगे बढ़ाने और खुशहाल रखने के प्रयास सफल होंगे। आमजन को अपराध, भ्रष्टाचार और समस्याओं से मुक्ति मिल सकेगी। रोजगार के अवसर बढ़ पाएंगे ताकि पलायन जैसी विकट समस्या रूक सके। डबल इंजन की सरकार विकास की पटरी पर सरपट दौड़ सकेगी।

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