क्या सारी तैयारियां हो गईं? पूजा के लिए ज़रूरी चीज़ें रखना न भूलें, पूरी लिस्ट देखें

Diwali Lakshmi Puja 2026: दीवाली के त्योहार में लक्ष्मी पूजन का दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दीवाली की खुशी दोगुनी हो जाती है, क्योंकि इसे इस त्योहार का मुख्य हिस्सा माना जाता है। दीवाली शुरू होते ही, सारा ध्यान लक्ष्मी पूजन की तैयारियों पर लग जाता है। कई जगहों पर लोग दीवाली की आम खरीदारी के साथ-साथ पूजा के लिए जरूरी सामान भी खरीद लेते हैं। हालांकि कई घरों में तैयारियां पूरी हो चुकी होंगी, फिर भी एक बार दोबारा जांच लेना अच्छा रहता है कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया। लक्ष्मी पूजन के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है? आइए, पूरी सूची देखते हैं…
लक्ष्मी पूजन रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगा। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6:00 बजे से रात 8:33 बजे तक है। आश्विन महीने की अमावस्या को भक्त पूरी विधि-विधान से देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इसमें घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाना, दरवाजों को गेंदे के फूलों की माला से सजाना और पारंपरिक दीवाली के नाश्ते (फराल), खील (लाह्या) और बताशे का भोग (नैवेद्य) लगाना शामिल है। इस दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान गणेश और भगवान कुबेर की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उन भक्तों के घरों में लंबे समय तक वास करती हैं, जो अपने घर को साफ-सुथरा रखकर उनका स्वागत करते हैं।
लक्ष्मी पूजन के दौरान इन बातों का ध्यान रखें
पूजा के समय देवी लक्ष्मी की दो मूर्तियां न रखें। केवल देवी लक्ष्मी की ही मूर्ति या तस्वीर न लगाएं; उनकी पूजा भगवान गणेश और देवी सरस्वती के साथ की जानी चाहिए। देवी लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर में उनके चेहरे पर प्रसन्नता और मुस्कान होनी चाहिए। दीवाली के लक्ष्मी पूजन में देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और भगवान गणेश को एक साथ स्थापित किया जाता है। इन देवी-देवताओं की मूर्तियों या तस्वीरों का मुख उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। देवी लक्ष्मी की मूर्ति कैसी होनी चाहिए?
लक्ष्मी पूजन के लिए देवी लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर कैसी होनी चाहिए—और कैसी नहीं—इस बारे में कुछ पारंपरिक मान्यताएं हैं। पूजा के लिए रखी जाने वाली देवी लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर में उन्हें बैठी हुई मुद्रा में होना चाहिए। ऐसी तस्वीर चुनना बेहतर है जिसमें उनके हाथों से धन (सोने के सिक्के) किसी पात्र में गिरते हुए दिखाई दे रहे हों। ऐसी तस्वीरों से बचना चाहिए जिनमें उनके हाथों से गिरते सोने के सिक्के सीधे ज़मीन पर गिर रहे हों। देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश का होना भी शुभ माना जाता है; ऐसी तस्वीरों या मूर्तियों में भगवान गणेश को देवी के दाईं ओर विराजमान होना चाहिए।
लक्ष्मी पूजन के लिए आवश्यक सामग्री
पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री आवश्यक मानी जाती है: देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां या तस्वीरें; लकड़ी की एक छोटी चौकी (पाटा/चौरांग); लाल या पीला कपड़ा; हल्दी और कुमकुम; अक्षत (बिना टूटे चावल के दाने); पान के पत्ते; सुपारी; नारियल (श्रीफल); लौंग; इलायची; धूप; कपूर; अगरबत्ती; दीपक; रुई की बत्तियां; पवित्र धागा (मौली); पंचामृत (दही, दूध, घी, शहद और चीनी का मिश्रण); गंगाजल; गुड़; साबुत धनिया; फल; फूल; जौ; गेहूं; दूर्वा (पवित्र घास); चंदन का लेप; सिंदूर; सूखे मेवे; लावा (खील); बताशे; यज्ञोपवीत (जनेऊ); वस्त्र; इत्र; कलश; कमल के फूलों की माला; शंख; आसन (बैठने के लिए); पूजा की थाली; सोने-चांदी के सिक्के; आम के पत्ते; और नैवेद्य (भोग)। लक्ष्मी पूजन की तैयारी कैसे करें? दिवाली के दौरान लक्ष्मी पूजन की तैयारी करते समय, अपने घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों और गेंदे के फूलों से बना एक ‘तोरण’ (सजावटी माला) ज़रूर लगाएं।
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सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने के लिए, प्रवेश द्वार के पास गंगाजल, हल्दी और कपूर का मिश्रण छिड़कें। लक्ष्मी पूजन—या किसी भी अन्य अनुष्ठान—के दौरान, अपने पूजा-घर में कुमकुम या सिंदूर से एक ‘स्वास्तिक’ बनाएं। स्वास्तिक को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है; यह पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को सुगम बनाता है और माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
– लक्ष्मी पूजन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घर में धन, समृद्धि और संपन्नता बनी रहे। यह पूजा न केवल भौतिक धन, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और मानसिक शांति भी लाती है। लक्ष्मी पूजन की रात, पूरे घर में तेल और घी के दीपक जलाए जाते हैं, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक हैं। माना जाता है कि इसी प्रकाश के सहारे देवी लक्ष्मी आसानी से घर में प्रवेश करती हैं।



