भारत का ‘बिगड़ैल पड़ोसी’ क्यों नहीं जीने देता चैन से, ताजे ब्लास्ट ने फिर बढ़ाई टेंशन

दोस्त बदल सकते हैं, मगर पड़ोसी नहीं। पड़ोसी यदि दोस्ती में रहेंगे तो दोनों तरक्की करेंगे। दुश्मनी में रहेंगे तो तरक्की सुस्त पड़ जाएगी। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का यह ताजा बयान भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों पर आया है। फारूक अब्दुल्ला ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का हवाला देकर भारत-पाक के संबंधों में सुधार लाने की वकालत की है। जम्मू-कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में भीषण ब्लास्ट की घटना से फारूक अब्दुल्ला काफी व्यथित हैं।

बिगड़ैल पड़ोसी से निपटना आसान नहीं

लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाद कश्मीर में ब्लास्ट की घटना ने देशभर में एकाएक सनसनी फैला दी थी। हालांकि नोगाम पुलिस स्टेशन में मानवीय चूक के कारण जानलेवा हादसा हुआ। वैसे फारूक अब्दुल्ला की बात में दम है। बिगड़ैल पड़ोसी से निपटना आसान नहीं होता है। फिर भारत की किस्मत में पाकिस्तान जैसा पड़ोसी है, जो न खुद सुख-शांति से रहना पसंद करता है, न दूसरों को शांति से रहने देता है। लाल किला ब्लास्ट केस की जांच चल रही है। केस के तार सीमापार से जुड़े होने के आसार नजर आ रहे हैं।

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इस बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार जावेद चौधरी का पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो मई माह का बताया जाता है। वीडियो में जावेद ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अलावा कुख्यात आतंकी हाफिज सईद व मौलाना मसूद अजहर का जिक्र किया है। जावेद कहते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर को लॉन्च कर भारत ने बड़ी गलती कर दी है।

हाफिज सईद व मसूद अजहर को फ्री हैंड

चूंकि हाफिज सईद व मसूद अजहर को पाक हुकूमत ने बड़ी मुश्किल से रोक रखा था। इन दोनों को अब फ्री हैंड मिल चुका है। वीडियो में खुलासा किया गया था कि सईद व अजहर ने भारत में अपने स्लीपर सेल को एक्टिव करना शुरू कर दिया है। अलबत्ता लाल किला ब्लास्ट में पाकिस्तान के दोनों कुख्यात आतंकियों के स्लीपर सेल का हाथ होने की संभावना बढ़ गई है। याद रहे कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हाफिज सईद के परिवार के लगभग दस सदस्य मारे गए थे। पिछले कुछ समय से यह खबरें भी आ रही हैं कि आईएसआई द्वारा भारत में महिला फिदायीन का दस्ता तैयार करने की साजिश की जा रही है। आतंकवाद के हिमायती पाकिस्तान का पक्का एवं स्थाई इलाज किए बगैर भारत का सिरदर्द दूर होना मुमकिन नहीं है।

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लाल किला ब्लास्ट की साजिश में कुछ डॉक्टरों की संलिप्तता ने नई टेंशन खड़ी कर दी है। डॉक्टरी पेशे को बेहद सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाता है। डॉक्टर को धरती का भगवान माना जाता है। यदि पढ़े-लिखे डॉक्टर इंसान की जान बचाने की बजाए जान लेने पर आमादा हो जाएंगे तो भरोसा किस पर किया जाएगा। देश के समक्ष फिलवक्त गंभीर चुनौतियां हैं।

चीन और अमेरिका जैसे मुल्क पहले से भारत की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। अमेरिका जहां मनमाने टैरिफ के आधार पर अर्थव्यवस्था को कमजोर करने में लगा है, वहीं चीन, पाकिस्तान व बांग्लादेश के साथ मिलकर षडयंत्र रच रहा है। नेपाल पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। अफगानिस्तान के साथ रिश्ते बेशक बेहतर हुए हैं, मगर इसका कोई बड़ा लाभ नजर नहीं आता है। लाल किला ब्लास्ट के दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाने की जरूरत है ताकि देशविरोधी ताकतें दोबारा से इस प्रकार की हिमाकत करने की हिम्मत न जुटा पाएं।

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