राहुल गांधी को करना होगा आत्मचिंतन, नहीं तो बंगाल-UP भी हाथ से गए; बीजेपी ने बनाया ये मास्टरप्लान

राहुल गांधी को आत्मचिंतन करने की जरूरत है। सियासी पिच पर वह बार-बार क्लीन बोल्ड हो रहे हैं। ऑलराउंडर होने की गलतफहमी उन्हें भारी पड़ रही है। राजनीति में वह असफलता के नए-नए रिकॉर्ड कायम कर रहे हैं। इसके बावजूद वह खुद में बदलाव करने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस की सफलता के लिए उन्हें पहले खुद को बदलना पड़ेगा।

निशाने पर राहुल गांधी

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के शर्मनाक प्रदर्शन से राहुल गांधी की छवि को धक्का लगा है। देश की सबसे पुरानी पार्टी आज सबसे खराब दौर से गुजर रही है। बिहार चुनाव में मिली करार हार के गम से राहुल गांधी अभी उबर भी नहीं पाए हैं कि उनके खिलाफ नया मोर्चा खुल चुका है। देश के 272 दिग्गजों ने चुनाव आयोग के समर्थन में खुला खत जारी कर कांग्रेस के युवराज को निशाने पर ले लिया है। इनमें रिटायर्ड जज, नौकरशाह, राजदूत और पूर्व सैनिक अधिकारी शामिल हैं। खत में राहुल गांधी की आलोचना की गई है।

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कांग्रेस सांसद पर चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं की साख खराब किए जाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। खुले खत में कहा गया है कि देश का लोकतंत्र इस समय जहरीली राजनीतिक बयानबाजी से चुनौती का सामना कर रहा है। देश के दिग्गजों का दर्द आसानी से समझ में आता है। विपक्षी दल लंबे समय से चुनाव आयोग के अलावा सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आदि पर बेबुनियाद आरोप लगाकर माहौल खराब कर रहे हैं।

विस चुनाव बिहार से पहले चुनाव आयोग पर वोट चोरी की तोहमत लगाई गई थी। चुनाव परिणाम आने के बाद भी विपक्ष के कुछ नेता दुष्प्रचार करने पर आमादा हैं। बात आम चुनाव की हो या राज्यों में विधानसभा चुनाव की, नतीजे यदि विपक्ष के अनुकूल आते हैं तो न चुनाव आयोग और ना मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, मगर यदि परिणाम विपक्ष के प्रतिकूल आते हैं तो आसमान सिर पर उठा लिया जाता है।

अंत में हाथ लगी निराशा

विपक्ष का यह दोहरा रवैया अब जनता को समझ आने लगा है। हरियाणा व महाराष्ट्र के बाद बिहार में विपक्ष को सत्ता हासिल नहीं हो सकी है। इसलिए वह सत्ता न मिलने की पीड़ा में छटपटा रहा है। महागठबंधन के दो प्रमुख चेहरे राहुल गांधी और अखिलेश यादव अधिक बेचैन हैं। दोनों ने बिहार का किला फतह करने के लिए ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगाया था, मगर अंतत: उन्हें निराशा हाथ लगी है। विपक्ष को कम से कम अब यह जान लेना चाहिए कि गड़बड़ी चुनाव आयोग में नहीं बल्कि उनकी साझा रणनीति में है। सिर्फ सनसनीखेज आरोप लगाने की राजनीति से जनता को लुभाना संभव नहीं है। उधर, बिहार में अप्रत्याशित जीत से उत्साहित भाजपा ने अब पश्चिम बंगाल को फतह करने की रणनीति पर ध्यान दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी के बयानों से इसके संकेत मिल चुके हैं। भविष्य में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का राज है। टीएमसी को सत्ता से बाहर करने के लिए भाजपा को नए विजन और रणनीति पर काम करना होगा। भगवा पार्टी का यूपी पर भी पूरा ध्यान है। यूपी में पिछले दो बार से विरोधियों को मात देने में भाजपा सफल रही है। देश के सबसे बड़े राज्य में पार्टी अपनी पकड़ को और मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

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