अखिलेश यादव का रायबरेली दौरा, जानें PDA रणनीति से लेकर सीट शेयरिंग तक क्या है पूरा प्लान

Akhilesh Yadav Rath Yatra Rae Bareli: उत्तर प्रदेश की सियासत में एसपी चीफ अखिलेश यादव ने कांग्रेस के पारंपरिक सियासी गढ़ रायबरेली में अपनी बहुचर्चित रथ यात्रा निकालकर हलचल तेज कर दी है। हालांकि पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि यह औपचारिक चुनावी पीडीए यात्रा नहीं है और मुख्य यात्रा शुरू होने में अभी थोड़ा वक्त शेष है।

तय कार्यक्रम के तहत अखिलेश यादव हरचंदपुर से सपा विधायक और प्रमुख ओबीसी नेता राहुल लोधी के आवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने सपा विधायक के साथ समाजवादी छात्रसभा के उन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया, जिनकी बीते 17 सितंबर को स्थानीय पुलिस अधिकारियों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ तीखी झड़प हुई थी।

पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद: ‘जो पीड़ित है, वही पीडीए है’

समाजवादी पार्टी की बनाई रणनीति के मुताबिक, अखिलेश यादव आने वाले दिनों में जिन भी जिलों का दौरा करेंगे, वहां की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर ऐसे परिवारों से विशेष रूप से मिलेंगे जो पुलिस प्रशासन की कथित एकतरफा कार्रवाई से पीड़ित या असंतुष्ट हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही सपा अपने बहुचर्चित पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनाने में जुटी हुई है। अखिलेश यादव खुद कई मंचों से स्पष्ट कर चुके हैं कि समाज में जो भी सताया हुआ या पीड़ित है, वह पीडीए परिवार का अभिन्न हिस्सा है। पार्टी का मानना है कि जब शीर्ष नेतृत्व खुद पीड़ित के दरवाजे तक पहुंचता है तो जमीन पर राजनीतिक भरोसा मजबूत होता है, जिससे यह यात्रा केवल सहानुभूति प्रकट करने तक सीमित न रहकर एक ठोस सामाजिक गठबंधन की नींव तैयार कर रही है।

रायबरेली से शुरुआत के पीछे क्या हैं असली सियासी मायने?

रायबरेली से रथ यात्रा शुरू करने के पीछे हालिया छात्रसंघ विवाद के अलावा कई गहरे चुनावी समीकरण जुड़े हुए हैं। विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस से गठबंधन न होने के बावजूद समाजवादी पार्टी ने रायबरेली जिले की सदर सीट को छोड़कर बाकी सभी 4 विधानसभा क्षेत्रों पर शानदार जीत दर्ज की थी। अब पार्टी की खास नजर ऊंचाहार विधानसभा सीट पर टिकी है। ऊंचाहार से लगातार तीन बार सपा के टिकट पर विधायक चुने गए डॉ. मनोज पांडेय पाला बदलकर वर्तमान में भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं, जिससे इस सीट पर नए समीकरण साधने की होड़ लगी है।

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गठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका और सीट शेयरिंग पर दबदबा बनाने की तैयारी

उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन जारी रहने की प्रबल संभावनाएं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गांधी परिवार के प्रभाव वाले रायबरेली जैसे हाई-प्रोफाइल जिले में अपनी ताकत और जनाधार का जोरदार प्रदर्शन कर अखिलेश यादव सहयोगी दल कांग्रेस को साफ संदेश देना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश के भीतर समाजवादी पार्टी ही मुख्य विपक्षी शक्ति है। आने वाले वक्त में जब दोनों दलों के बीच सीट-बंटवारे (सीट-शेयरिंग) की टेबल पर बातचीत होगी, तो सपा रायबरेली सहित पूरे प्रदेश में अपनी मजबूत जमीनी पकड़ का हवाला देकर ‘बड़े भाई’ की हैसियत से ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी पक्की कर सकेगी।

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