धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, जानें कौन सी और कितनी संख्या में लाना होता है शुभ

Dhanteras Broom Buying Rules 2026: दीपावली से दो दिन पहले आने वाले धनतेरस के त्योहार पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने के अलावा झाड़ू लाने की सदियों पुरानी परंपरा है। सनातन मान्यताओं के अनुसार झाड़ू को घर की स्वच्छता और साक्षात मां लक्ष्मी के वास से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में ही सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है, इसलिए दीपोत्सव से पहले लोग घरों के कोने-कोने को चमकाने में जुट जाते हैं। शास्त्रों और लोक परंपराओं में धनतेरस पर नई झाड़ू घर लाने से दरिद्रता का नाश होता है और पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहती है।
बाजार से झाड़ू चुनते समय उसकी बनावट का खास ख्याल रखना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से प्राकृतिक घास या मजबूत सींक वाली झाड़ू खरीदना सबसे उत्तम माना जाता है। मजबूत सींक या अच्छी गुणवत्ता वाली फूल झाड़ू को प्राथमिकता दी जाती है, साथ ही हाथों से तैयार पारंपरिक झाड़ू भी लोग चाव से खरीदते हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी स्थानीय परंपरा के मुताबिक ही झाड़ू की किस्म का चयन किया जाता है।
संख्या को लेकर भी लोक मान्यताओं में स्पष्ट नियम बताए गए हैं। धनतेरस के मौके पर विषम संख्या यानी 3, 5 या 7 की तादाद में झाड़ू खरीदना बेहद फलदायी और मंगलकारी माना गया है। लोग अपनी जरूरत और घर की क्षमता के अनुसार ही इन शुभ संख्याओं में झाड़ू चुनते हैं।
धनतेरस पर 100 साल बाद दुर्लभ ‘मालव्य राजयोग’! 3 राशियों पर बरसेंगे कुबेर के खजाने, रातों-रात बनेंगे धनवान!
नई झाड़ू को घर लाने के तुरंत बाद उपयोग में नहीं लाया जाता, बल्कि पहले उसका विधिवत पूजन होता है। शुभ मुहूर्त में झाड़ू पर हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्पित कर मां लक्ष्मी का ध्यान किया जाता है। इसके साथ ही झाड़ू पर पवित्र सफेद धागा बांधने की भी परंपरा है, जो घर में बरकत को बांधने का प्रतीक है। पूजा-अर्चना के बाद ही इस नई झाड़ू से दिवाली के दिन पूजा घर और मंदिर स्थल की सफाई कर उत्सव की तैयारियां शुरू की जाती हैं। हर क्षेत्र और परिवार में रीति-रिवाज थोड़े भिन्न हो सकते हैं, इसलिए अपनी कुल परंपरा का आदर करना सबसे श्रेष्ठ है।



