Supreme Court News: CJI पर हमला, जानें अधिवक्ता पर क्या कार्रवाई हुई

Supreme Court News In Hindi: सुप्रीम कोर्ट में CJI बीआर गवई पर हमले की कोशिश से मचा हड़कंप। पीएम मोदी से बातचीत, राजनैतिक प्रतिक्रियाएं तेज।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई पर हमले की कोशिश का मामला वाकई बेहद चिंताजनक है। इस आश्चर्यचकित घटनाक्रम पर सियासी हलचल एकाएक बढ़ गई है। लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मामले की घोर निंदा की है। पीएम नरेंद्र मोदी ने CJI से घटना पर बात कर ऐसी स्थिति में उनकी तरफ से दिखाई गई शांति की सराहना की।

कोर्ट परिसर में वयोवृद्ध अधिवक्ता की शर्मनाक हरकत के बाद CJI ने जिस प्रकार का संयम बरता, वह काबिले तारीफ है। जीवन में संयम एवं शांति का विशेष महत्व माना गया है। इसके जरिए प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटना आसान होता है। Supreme Court परिसर से बाहर निकाले जाने के दौरान अधिवक्ता ने ‘सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसा नारा भी लगाया था। इससे साफ है कि CJI की किसी टिप्पणी या बात से आहत होकर अधिवक्ता ने वह कदम उठाया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।

CJI ने कर दिया माफ (Supreme Court Today News)

CJI ने बेशक अधिवक्ता को माफ कर दिया है, मगर बार काउंसिल ने आरोपी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कर सभी अधिवक्ताओं को कड़ा संदेश दे दिया है। वैसे देश में माननीयों के अपमान का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ समय पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनता दरबार में हमला होने का मामला प्रकाश में आया था। जनता दरबार के दौरान एक फरियादी ने अचानक उन पर हमला कर दिया था। तब सीएम की सुरक्षा को लेकर तमाम तरह के सवाल उठाए गए थे।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर रोड शो के समय ऑटो चालक ने मारपीट कर दी थी। मनमोहन सिंह सरकार के समय भी एक केंद्रीय मंत्री पर जूता फेंके जाने की घटना सामने आई थी। किसी न किसी माननीय को अक्सर ऐसे घटनाक्रम का सामना करना पड़ता है, जिसे वह आजीवन नहीं भूल सकते। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में प्रत्येक नागरिक को खुलकर बोलने की आजादी है। किसी भी मुद्दे पर असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, मगर भारतीय संविधान यह छूट नहीं देता कि आप यदि किसी बात से सहमत नहीं हैं तो एग्रेसिव होकर हमलावर मुद्रा में आ जाएं। असहमति प्रकट करने का शालीन तरीका सबसे बेहतर है।

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CJI गवई ने अपने साथ घटित वाक्या जब भूला दिया है तब इस मुद्दे पर बेवजह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। राजनेताओं को इस प्रकार के बयान से बचना चाहिए, जो विवाद को बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इस बात पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस प्रकरण पर कहा है कि कुछ व्यक्तियों के हाथ में जाकर जूता भी अपमानित महसूस करता है।

सपा अध्यक्ष पीडीए का बखान करने में जुट गए हैं। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम एवं राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि संविधान-दलित विरोधी भाजपाई चुप क्यों हैं? दरअसल विपक्षी दलों ने मौका देखकर दलित समुदाय को प्रभावित करने की कोशिश आरंभ कर दी है। राजनेताओं की आक्रामक बयानबाजी से यह मामला ठंडा होने की बजाए गरमाने के आसार दिखाई दे रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। आरोपी अधिवक्ता को भी इस मामले में तीखी बयानबाजी से परहेज करने की जरूरत है।

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