Coldrif Cough Syrup: सांसों को तोड़ता सिरप, कंपनी और तंत्र दोनों में कौन जिम्मेदार
Coldrif Cough Syrup In Hindi: सिरप बच्चों की मौत ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। जांच में जहरीले केमिकल की पुष्टि, कंपनी व सिस्टम दोनों कटघरे में।

Coldrif Cough Syrup पर आजकल देशभर में हंगामा बरप रहा है। कफ सिरप के सेवन से विभिन्न राज्यों में ग्यारह से अधिक बच्चों की मौत होना चिंताजनक है। जहरीले सिरप ने जिन घरों के चिराग बुझा दिए हैं, वहां कोहराम मचना स्वाभाविक है।
दवा यदि मर्ज का इलाज करने की बजाए जान लेने पर आमादा हो जाए तो डॉक्टर और दवा पर भला कैसे भरोसा किया जाएगा?
सभ्य समाज में डॉक्टर को भगवान का दर्जा प्राप्त है। जब धरती का भगवान हार मान जाता है तब आखिरी उम्मीद ईश्वर पर रहती है। Coldrif Cough Syrup और इसकी निर्माता कंपनी श्री सन फार्मास्युटिकल के विरुद्ध जांच शुरू हो चुकी है। शुरुआती जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही हैं।
कंपनी का मुख्यालय तमिलनाडु के चेन्नई में है। सिरप की जांच में इसमें अड़तालीस फीसदी से ज्यादा डाई एथिलीन ग्लाइकॉल मिला है। यह एक जहरीला केमिकल है।
सबसे अहम सवाल यह कि जहरीले रसायन से तैयार कफ सिरप अलग अलग राज्यों में धड़ल्ले से बिकता रहा, मगर जिम्मेदार विभाग को इसकी कोई खबर नहीं थी। इसमें दो राय नहीं कि वर्तमान में देश-दुनिया में दवाओं का बाजार अरबों-खरबों का हो चुका है।
निजी कंपनियों के बीच दवाओं की बिक्री के लिए गला-काट प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। दवाओं पर मार्जिन का अंदाजा लगाना भी नामुमकिन है।
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मेडिकल स्टोर पर कोई दर्द निवारक गोली या सिरप खरीदने चले जाइए, ग्राहक को वही रकम अदा करनी पड़ती है जो विक्रेता बताता है। जबकि कई दवाओं पर मनमाने तरीके से दाम वसूले जाते हैं।
एक जमाने में खांसी-जुकाम और मामूली बुखार आने पर दादी-नानी के नुस्खे घर-घर में अपनाए जाते थे, मगर जैसे-जैसे समय गुजरता गया यह घरेलू नुस्खे घरों से गायब होते गए। खांसी-जुकाम व मामूली बुखार को आज इतना बड़ा व गंभीर बना दिया गया है, जो पहले नहीं था। इसकी एक वजह हर छोटी तकलीफ होने पर दवा के इस्तेमाल की लत बढ़ना है।
सिरदर्द व बदनदर्द होने पर भी अधिकांश नागरिक तुरंत मेडिकल स्टोर जाकर दवा खरीदने में देरी नहीं करते हैं। Coldrif Cough Syrup जैसे विभिन्न कंपनियों के सिरप बाजार में उपलब्ध हैं। कहा जाता है कि यदि एक बार दवा खाने की आदत पड़ जाए तो वह आसानी से नहीं जाती।
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दर्द निवारक दवाओं व सिरप के निरंतर सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। cough medication से बच्चों की मौत के मामले में जितना दोष कंपनी है, उतना ही कसूर उस तंत्र का भी है, जिस पर दवाओं की गुणवत्ता को परखने की जिम्मेदारी है।
बगैर मानक और जांच-पड़ताल के यह सिरप अलग-अलग राज्यों में सालों-साल यदि बिकता रहा है तो इसके लिए उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए, जो इस ओर से आंखें मूंद कर बैठे रहे।
देश में कैंसर, टीबी और शुगर आदि बीमारियों को ठीक करने से जुड़ी दवाएं भी नकली बनती व बिकती रही हैं। इसके बावजूद दवाओं की जांच-परख के नाम पर सरकारी स्तर से महज खानापूर्ति होना चिंता का विषय है।
केंद्र सरकार ने इस प्रकरण में बेशक राज्यों को एडवाइजरी जारी कर दी है, मगर इतने भर से कुछ नहीं बदलेगा। केंद्र को कोई बड़ा फैसला लेने की जरूरत है ताकि भविष्य में नकली और जहरीली दवाओं की वजह से फिर किसी बेकसूर की जान न जाए।



