कौन है वो ‘सफेदपोश’ जिसे चाहिए थी ‘एक्स्ट्रा सर्विस’, अंकिता की मौत का वो अनसुना राज

देवभूमि उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा होने और राज्य सरकार द्वारा हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश कर देने के बावजूद विवाद शांत नहीं हो पाया है। इसके चलते सत्ता पक्ष की मुश्किलें बरकरार हैं। विपक्ष और विभिन्न संगठनों के आक्रामक तेवरों ने धामी सरकार की सिरदर्दी बढ़ा रखी है।
ताजा विवाद की वजह सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो क्लिप, ‘एक्सट्रा सर्विस’ और ‘वीआईपी’ जैसे बिंदु हैं। अनाम ‘वीआईपी लीडर’ के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी की मांग जोर पकड़ रही है। नए सिरे से विरोध-प्रदर्शन के कारण उत्तराखंड में सरकार और भाजपा की छवि खराब हो रही है। तीन साल चार माह पहले यह सनसनीखेज हत्याकांड प्रकाश में आया था।
होटल में बतौर रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत अंकिता की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने पिछले साल मई में इस प्रकरण में 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुना दी थी। दोषी करार पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर जेल की हवा खा रहे हैं। कुछ दिन पहले महिला उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किए जाने के बाद से यह मामला पुन: गर्मा चुका है।
इस वजह से की अंकिता की हत्या
महिला का दावा था कि होटल में ‘वीआईपी’ को ‘एक्सट्रा सर्विस’ देने से मना करने पर अंकिता को मौत के घाट उतारा गया था। महिला ने वीडियो के अलावा एक ऑडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर शेयर की। ऑडियो क्लिप में उस वीआईपी के नाम का उल्लेख है, जिसे ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ दी जानी थी। आरोप है कि यह वीआईपी सत्ता पक्ष से जुड़े हैं। राजनीतिक रसूख के कारण उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई।
सोशल मीडिया पर वीडियो और ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद से अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की सियासत को गरमा रखा है। कांग्रेस के अलावा विभिन्न संगठन ‘वीआईपी’ की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। सियासी तनातनी के बीच इस हत्याकांड की सीबीआई जांच का रास्ता खुल चुका है, मगर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
जानकारों का मानना है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मामले के बहाने राज्य में भाजपा को डाउन करने के साथ-साथ खुद को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। दरअसल अंकिता हत्याकांड ने राज्य में उन मध्यम वर्गीय परिवारों को उद्वेलित किया है, जिनकी बेटियां कामकाज के सिलसिले में घर से बाहर जाती हैं। इन परिवारों को अपनी बेटियों की चिंता सता रही है। पृथक राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। वहां कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा के हाथ में सत्ता की कमान रहती है।
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फिलहाल भाजपा की सरकार है और पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार का संचालन हो रहा है। कांग्रेस के पुराने एवं वरिष्ठ नेता हरीश सिंह रावत सक्रिय नहीं हैं। कांग्रेस को लगता है कि इस मामले के बहाने वह राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल हो सकती है। इस पहाड़ी राज्य में अवैध घुसपैठ, लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे मामले भी वक्त वक्त पर गरमाते रहे हैं।
मौजूदा सीएम पुष्कर सिंह धामी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के व्यक्ति हैं। विषम परिस्थितियों से मुकाबला करने में वह सक्षम हैं। हालांकि ताजा मामला उनके लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है। जिस वीआईपी को लेकर उत्तराखंड में आक्रोश बढ़ रहा है, क्या उसे न्याय के कटघरे में लाया जा सकेगा, यह सवाल चर्चाओं में है।



