rajnath singh statement on pok: पीओके खुद कहेगा – मैं भी भारत हूं!

राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान – पीओके लेने के लिए अब गोलियों की नहीं, बोलियों की जरूरत!

rajnath singh statement on pok: ‘पीओके पर हमला कर कब्जा करने की जरूरत नहीं है। यह वैसे भी हमारा है। पीओके खुद कहेगा मैं भी भारत हूं। वह दिन भी आएगा’। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह ताजा बयान पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ाने के लिए काफी है। यह बयान सुनकर पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आर्मी चीफ असीम मुनीर के अलावा ख्वाजा आसिफ, बिलावल भुट्टो व शाहिद अफरीदी जैसों को मिर्ची लगना तय है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) हमेशा अशांत रहा है। इसका मुख्य कारण आर्मी की दमनकारी नीतियां हैं। पीओके में लंबे समय से आजादी की मांग उठ रही है। आम नागरिक की आवाज को आर्मी के जवान अक्सर डंडे व बंदूक के बल पर दबाने का प्रयास करते रहे हैं। बड़ी संख्या में नागरिकों को अगवा कर मौत के घाट उतार दिया गया है। भारत ने पीओके को हमेशा अपना अभिन्न अंग माना है।

पीओके को वापस लेने की मांग भारत में उठती रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई मौकों पर इस मुद्दे पर बात रख चुके हैं। pok पर statement देते हुए rajnath singh ने कहा कि एक बार फिर इस बात पर जोर दिया है कि पीओके की वापसी बगैर हमला किए संभव है। वह दिन जल्द आ जाएगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच दूरियां और अधिक बढ़ गई हैं। दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आने की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है। असल में पाकिस्तान आतंकवाद से मुंह फेरने की बजाए भारत के साथ शत्रुता रखना आवश्यक समझता रहा है। वर्तमान में वह अमेरिका की छत्र छाया में रहकर नई दिल्ली के खिलाफ षड्यंत्र की नई नीतियां तैयार कर रहा है।

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पाकिस्तान ने सऊदी अरब संग रक्षा सौदा कर खुद को सुरक्षित करने की कोशिश की है। यह समझौता कर वह भारत को परेशान करने की मंशा पाले है। हालांकि इस षड्यंत्र में वह कभी कामयाब नहीं हो पाएगा। भारत पर रणनीतिक बढ़त बनाने के मकसद से पाकिस्तान ने अमेरिका, चीन, रूस, तुर्की, बांग्लादेश, सऊदी अरब, फिलिस्तीन आदि देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। अफगानिस्तान पर डोरे डालने में वह नाकाम है।

भारत के प्रति पाकिस्तान की कटुता खेल मैदान पर भी नजर आती रही है। कुछ दिन पहले एशिया कप के लीग मैच में भारतीय टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव द्वारा हाथ न मिलाए जाने के मामले को पाकिस्तान ने जिस प्रकार से तूल दिया, वह उसकी खिसियाहट को दर्शाता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने मैच रेफरी को हटवाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था।

टूर्नामेंट का बहिष्कार करने तक की गीदड़भभकी दे दी गई थी। किसी ने सच कहा है कि पाकिस्तान जैसा पड़ोसी किसी को नहीं मिलना चाहिए। चूंकि न वह खुद शांति से रहेगा और ना दूसरे को रहने देगा। सच्चाई यह भी है कि वह कभी चीन तो कभी अमेरिका के हाथ की कठपुतली बनता रहा है। भारत को परेशान के लिए चीन और अमेरिका समय-समय पर पाकिस्तान को आगे करते रहे हैं।

इतिहास पलटने पर मालूम पड़ता है कि अमेरिका कभी भारत का भरोसेमंद दोस्त नहीं रहा है।

पाकिस्तान के विभाजन के दौरान यूएस ने जो कदम उठाया था, उसे भूलना नहीं चाहिए। उस वक्त यदि रूस ने सच्ची दोस्ती न निभाई होती तो भारत को गंभीर संकट का सामना करना पड़ता। भारत संग सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह कभी किसी एक खेमे में दृढ़ता के साथ खड़े रहने का ऐलान नहीं करता। जबकि पाकिस्तान परिस्थितियों के अनुरूप अपना चेहरा बदलता रहता है।

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