चुनाव आयोग की SIR मुहिम, ले रही है BLO की जान; जानें कितना है वर्कलोड

देशभर में चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चल रहा है। वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने की यह कवायद बाहर से जितनी साधारण लगती है, अंदर से उतनी ही जटिल और तनावपूर्ण साबित हो रही है। आम नागरिक अपने नाम की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं तो बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मानसिक और शारीरक थकान की ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं कि कई जगहों से खुदकुशी की दुखद खबरें आ रही हैं।
नाम कटने का डर और घर-घर दस्तक
लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है – अगर 2003 से पहले का पुराना वोटर कार्ड या माता-पिता का वोटर नंबर नहीं मिला तो क्या नाम ही कट जाएगा? कई इलाकों में अफवाहें फैल रही हैं कि फॉर्म समय पर जमा नहीं हुआ तो वोट का अधिकार छिन जाएगा। नतीजा यह कि लोग पुराने कागजात खंगाल रहे हैं, फोटोकॉपी करवा रहे हैं और BLO का पीछा कर रहे हैं।
एक अनार, सौ से ज्यादा बीमार
एक बूथ में औसतन 1200-1500 मतदाता होते हैं। ज्यादातर जगहों पर सिर्फ एक ही BLO पूरा काम संभाल रहा है। शिक्षक हैं तो स्कूल की छमाही परीक्षा भी साथ-साथ चल रही है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं तो केंद्र का रूटीन भी बाधित नहीं करना। घर-घर फॉर्म बाँटना, भरवाना, मिलान करना, ऑनलाइन अपलोड करना – ये सारे काम एक ही कंधों पर। ऊपर से कई मतदाताओं का असहयोग और गाली-गलौज अलग से मानसिक आघात दे रहा है।
BLO की चुप्पी और छिपा दर्द
नोएडा से बंगाल तक जितने भी BLO से बात हुई, कैमरे के सामने कोई बोलने को तैयार नहीं। नौकरी जाने का डर इतना है कि अपना दर्द भी छिपा रहे हैं। लंच का समय नहीं, नेचुरल कॉल के लिए पाँच मिनट भी मुश्किल। जिनके पास अपना वाहन नहीं, वे दूर-दराज की सोसाइटी तक पैदल या अनजान रास्तों से पहुँच रहे हैं। कुछ जगहों पर तो लोग शाम सात बजे के बाद भी BLO को बुला रहे हैं।
सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया
पश्चिम बंगाल में हाल में हुई एक महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की खुदकुशी ने सबको हिला दिया। सुसाइड नोट में साफ लिखा था कि 95% ऑफलाइन काम पूरा हो चुका था, मगर ऑनलाइन प्रक्रिया समझ नहीं आई और सुपरवाइजर ने कोई मदद नहीं की। राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल से भी इसी तरह की खबरें आईं जहां परिवारों ने अतिरिक्त कार्यभार और अधिकारियों की बेरुखी को मौत का कारण बताया।
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क्या हर BLO टूट रहा है?
सच यह भी है कि हर जगह हालात एक से नहीं। जहाँ समाज शिक्षित और सहयोगी है, वहाँ युवा BLO स्मार्ट तरीके से काम निपटा रहे हैं। व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर फॉर्म कलेक्ट कर रहे हैं, शाम को मीटिंग रख रहे हैं। मगर ऐसे इलाके कम हैं। ज्यादातर जगहों पर अशिक्षित मतदाता, गलत भरे फॉर्म, बार-बार सुधार और डेडलाइन का दबाव BLO को तोड़ रहा है।



