कमाई के आंकड़ों में 15 लाख करोड़ की गड़बड़ी; LIC पर संकट के बादल; केनरा बैंक ने उठाया बड़ा कदम

Rajesh Exports News: मार्केट रेगुलेटर SEBI ने जाने-माने ज्वेलरी एक्सपोर्टर, ‘राजेश एक्सपोर्ट्स’ और उसके प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। SEBI की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अपनी कमाई के आंकड़ों में लगभग ₹15.15 लाख करोड़ की भारी वित्तीय अनियमितताएं और फंड में हेराफेरी की है। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद, देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के लिए भी चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि LIC का इस विवादित कंपनी में एक बड़ा निवेश है—जिसमें 10 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी शामिल है।

आखिर मामला क्या है?

SEBI की जांच में पता चला कि, कई वर्षों तक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से अपने व्यावसायिक कार्यों और राजस्व के आंकड़ों को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। कंपनी के कुल समेकित राजस्व का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी संस्थाओं—विशेष रूप से, स्विट्जरलैंड स्थित ‘Valcambi SA’—से आया हुआ दिखाया गया था।

राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन विदेशी संस्थाओं के वित्तीय आंकड़ों का कभी खुलासा नहीं किया। हालाँकि, जब Valcambi के अलग से ऑडिट किए गए खातों की बारीकी से जांच की गई, तो उसकी वास्तविक कमाई नगण्य पाई गई। SEBI के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021 और 2025 के बीच, कंपनी ने सहायक कंपनी के राजस्व के आंकड़ों में लगभग ₹15.15 लाख करोड़ की हेराफेरी की—यह राशि इस अवधि के दौरान कंपनी की कुल रिपोर्ट की गई कमाई का 99.8 प्रतिशत थी। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2021 और 2024 के बीच कंपनी के अलग से दिखाए गए राजस्व के आंकड़ों में भी ₹12,557 करोड़ की अनियमितताएं पाई गईं।

शेयरों पर असर और SEBI का प्रतिबंध

कमाई के आंकड़ों में की गई इन हेराफेरी के दुष्परिणाम गुरुवार को बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों पर साफ दिखाई देने लगे। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर, राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 4.99 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ ₹103.92 पर आ गए, और ‘लोअर सर्किट’ को छू लिया। कड़ा रुख अपनाते हुए, SEBI ने कंपनी और उसके चेयरमैन, राजेश मेहता को, अपनी जांच पूरी होने तक प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।

निजी लेन-देन को कंपनी की बिक्री के तौर पर दिखाया गया

अपनी रिपोर्ट में, SEBI ने यह भी आरोप लगाया है कि चेयरमैन राजेश मेहता ने अपने निजी स्तर पर किए गए डेरिवेटिव लेन-देन को कंपनी द्वारा की गई बिक्री और खरीद के तौर पर दर्ज किया। इन एंट्रीज़ में गलत तरीके से ₹11,487 करोड़ की बिक्री और ₹11,488 करोड़ की खरीद दिखाई गई थी। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉज़िट (FDs) से होने वाली ब्याज़ आय, साथ ही विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से होने वाले मुनाफ़े को भी गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया और ‘कंपनी के मुख्य कार्यों से होने वाली आय’ के तौर पर पेश किया गया।

LIC का बड़ा निवेश

इस पूरे वित्तीय घोटाले के बाद, LIC की निवेश रणनीति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मार्च 2026 के तिमाही आंकड़ों के अनुसार, LIC—जो देश का सबसे बड़ा घरेलू संस्थागत निवेशक है—की राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.80 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है। रिकॉर्ड बताते हैं कि LIC ने सितंबर 2023 से लगातार कंपनी में अपनी यह महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनाए रखी है, और अपनी निवेश स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया है।

केनरा बैंक द्वारा बड़ी कार्रवाई

NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र का बैंकिंग दिग्गज, केनरा बैंक, इस पूरे मामले में एक अहम कड़ी के तौर पर जुड़ा है। चूंकि राजेश एक्सपोर्ट्स ऋण चुकाने की शर्तों और नियमों को पूरा करने में विफल रहा, इसलिए बैंक ने कंपनी को दिए गए ऋण को ‘तनावग्रस्त ऋण’ (Stressed Loan) श्रेणी में डाल दिया है।

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राजेश एक्सपोर्ट्स पर इस समय केनरा बैंक का कुल ₹509 करोड़ का बकाया है। केनरा बैंक ने अब इस कंपनी को दिए गए अपने पूरे तनावग्रस्त ऋण को बेचने का फैसला किया है। बैंक एक खुली नीलामी के माध्यम से इस तनावग्रस्त ऋण को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी करने का इरादा रखता है। केनरा बैंक अब इस मामले को दिवाला प्रक्रिया (insolvency process) के तहत ले जाना चाहता है और कंपनी को दिए गए अपने ऋण से पूरी तरह बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है।

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