ईरान की ये आर्मी US के लिए साबित हो रही है बड़ी चुनौती, हर बार ट्रंप को देती है मुंहतोड़ जवाब

Iran Mosquito Fleet: होरमुज़ जलडमरूमध्य में, ईरान की ‘मच्छर सेना’ (Mosquito Army) ने सचमुच अमेरिका को कड़ी टक्कर दी है! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सेना को लेकर बार-बार अपना गुस्सा ज़ाहिर किया है; यह सेना ईरानी सेना का एक अहम हिस्सा है।

जब अमेरिका और इज़रायल जैसे ताकतवर देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया, तो कई लोगों को लगा कि वे इस देश को पलक झपकते ही हरा देंगे—खुद अमेरिका ने भी ऐसा ही दावा किया था। लेकिन, ईरान ने साबित कर दिया कि वह उन सभी का सामना करने में सक्षम है और वह अब भी डटकर मुकाबला कर रहा है। खासकर होरमुज़ जलडमरूमध्य में, ईरान की ‘मच्छर सेना’ ने सचमुच अमेरिका को उसकी हद तक चुनौती दी है!

ट्रंप को हर बार मुंहतोड़ जवाब देती है ये सेना

ईरान ने छोटी नावों का इस्तेमाल करके समुद्र में बार-बार अपना दबदबा दिखाया है। अमेरिका जैसी महाशक्ति के खिलाफ, ईरान के ‘मच्छर बेड़े’ (Mosquito Fleet) द्वारा अपनाई गई गुरिल्ला युद्ध की रणनीतियाँ बहुत असरदार साबित हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि ईरानी नौसेना पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। फिर भी, अपने पारंपरिक युद्धपोतों को भारी नुकसान पहुँचने के बावजूद, होरमुज़ जलडमरूमध्य में ईरान का दबदबा कम नहीं हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, होरमुज़ जलडमरूमध्य में ईरान का सामना करना कोई आसान काम नहीं है, क्योंकि इस देश के पास कई ‘अदृश्य हथियार’ हैं। इन हथियारों में सबसे अहम है उनका ‘मच्छर बेड़ा’ यानी ‘मच्छर सेना’!

होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों को धमकाने की ईरान की क्षमता, असल में, गैर-पारंपरिक युद्ध प्रणालियों की कई परतों पर निर्भर करती है। इनमें ड्रोन हमले, समुद्री बारूदी सुरंगें और ‘मच्छर सेना’ शामिल हैं। पारंपरिक नौसैनिक संपत्तियों की तुलना में, इन गैर-पारंपरिक साधनों का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी इन छोटी नावों ने अमेरिकी सेना के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इन नावों पर तैनात मिसाइलें, बंदूकें और दूसरे हथियार खास तौर पर अहम हैं। “मच्छर बेड़ा” असल में नौसैनिक गुरिल्ला युद्ध का ही एक रूप है।

होरमुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरानी द्वीपों की मौजूदगी इस बेड़े की ताकत को और भी बढ़ा देती है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के संकरे रास्ते से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ और शक्तिशाली युद्धपोत भी इस ईरानी बेड़े के सामने खुद को कमज़ोर पाते हैं! इस बेड़े में छोटी, तेज़ रफ़्तार और फुर्तीली नावें शामिल हैं। इनकी मुख्य रणनीति हमला करना और फिर तेज़ी से वहाँ से निकल जाना है।

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इसे समुद्री यातायात को बाधित करने या युद्धपोतों को नुकसान पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह बेड़ा खुले समुद्र में ठीक एक छापामार सेना की तरह काम करता है। यह “हिट-एंड-रन” (हमला करो और भाग जाओ) की रणनीति पर निर्भर रहता है। इस “मच्छर बेड़े” (Mosquito Fleet) की नावों का इस्तेमाल करके, गार्ड नेवी छिपी हुई जगहों से मिसाइल और ड्रोन लॉन्च कर सकती है। ये नावें अक्सर इतनी छोटी होती हैं कि सैटेलाइट तस्वीरों में भी दिखाई नहीं देतीं। इन्हें आमतौर पर चट्टानी तटों पर बनी गहरी गुफाओं के अंदर बने गोदीघरों में खड़ा किया जाता है; जब भी ज़रूरत पड़ती है, इन्हें तुरंत समुद्र में उतारा जा सकता है।

ये नावें अचानक सामने आकर किसी बड़े युद्धपोत को घेर सकती हैं और उसे भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं। ये जहाज़ लगभग 100 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने में सक्षम हैं। ये रडार की पकड़ में नहीं आते और इन्हें रोकना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, ये नावें जहाज़-रोधी मिसाइलों, रॉकेट लॉन्चरों, मशीन गनों और यहाँ तक कि आत्मघाती ड्रोनों से भी लैस होती हैं। इसी ‘मच्छर बेड़े’ की ताक़त के दम पर ईरान आज भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना दबदबा बनाए हुए है।

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