आंखों की रोशनी गई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी; पास किया UPSC एग्जाम

8वीं में चली गई आंखों की रोशनी, लेकिन आज UPSC में AIR 91! मनु गर्ग की कहानी आपको रुला देगी!

Manu Garg: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इसमें शामिल होते हैं, मगर बहुत कम ही सफल हो पाते हैं। जयपुर के शास्त्री नगर निवासी मनु गर्ग अब एक अधिकारी हैं। उन्होंने 2024 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय रैंक (AIR) 91 हासिल की है। आठवीं कक्षा में पढ़ते समय उनकी आँखों की रोशनी चली गई थी।

मनु की सफलता में उनकी माँ का अहम योगदान रहा। सिर्फ़ मनु का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उनकी माँ ने उन्हें दृष्टि भी दी और हर कदम पर उनका साथ दिया। आठवीं कक्षा में पढ़ते समय मनु की आँखों की रोशनी चली गई। वह ब्लैकबोर्ड भी नहीं देख पाते थे। उन्होंने कई डॉक्टरों के पास गए, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। उन्हें एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार का पता चला, जो रेटिना को नुकसान पहुँचाता है।

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मनु ने जयपुर के प्रसिद्ध सेंट जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई की। उसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल की। वह पढ़ाई में बहुत अच्छे थे और अक्सर कक्षा में अव्वल आते थे। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

मनु ने देश भर में 150 से ज़्यादा वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है। कॉलेज के दिनों में ही वो एक स्टार वाद-विवादकर्ता बन गए थे। वे कहते हैं कि वाद-विवाद मेरे लिए पहचान बनाने का एक ज़रिया था। इसने मुझे उस दुनिया में एक आवाज़ दी जहाँ लोग अक्सर आँखें मूंद लेते हैं।

Manu Garg ने लिया तकनीक का सहारा

मनु ने तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने स्क्रीन रीडर, फ़ोन टॉकबैक टूल, ऑडियो पीडीएफ़ और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल किया। इन उपकरणों का इस्तेमाल करके, मनु ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने 2023 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी, मगर उनकी उम्मीद के मुताबिक कुछ नहीं हुआ।

उन्होंने अपने पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली, मगर मुख्य परीक्षा में असफल रहे। मगर उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध को अपने वैकल्पिक विषयों के रूप में चुना। इस दौरान, उनकी माँ उनके साथ एक सहारे की तरह खड़ी रहीं, उन्हें किताबें पढ़कर सुनाती रहीं और उनकी पढ़ाई में खूब मदद करती रहीं। अपने दूसरे प्रयास में मनु ने 91वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।

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