indian market and festival: इस दिवाली विदेशी नहीं स्वदेशी अपनाएं, जानें ये क्यों जरूरी
देशभर में दीपावली की धूम, स्वदेशी वस्तुओं को अपनाकर करें त्योहार की खरीदारी। जानें क्यों जरूरी

indian market and festival: देशभर में दीपावली पर्व की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। पांच दिवसीय यह त्योहार धनतेरस से आरंभ होकर भैया दूज पर संपन्न होगा। दीपावली से पहले प्रतिवर्ष घरों की साफ-सफाई एवं रंगाई-पुताई की जाती है। घर-घर में आकर्षक सजावट और रंग-बिरंगी लाइटों की व्यवस्था होती है। मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए हर कोई उत्साहित रहता है।
दीपावली खुशियां मनाने, मिठाई एवं उपहारों का आदान-प्रदान करने के अलावा महालक्ष्मी की कृपा पाने का सुनहरा मौका माना जाता है। इस पर्व पर जमकर खरीदारी की जाती है। धनतेरस पर बर्तन, आभूषण एवं वस्त्रों की खरीदारी का महत्व होता है। भारत में दीपावली पर हर साल अरबों-खरबों का कारोबार होता है। प्रत्येक दुकानदार और कारोबारी को अच्छा कारोबार होने की उम्मीद होती है। ऐसे में स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी जरूर की जानी चाहिए। देश में ‘स्वदेशी अपनाओ’ की मुहिम चल रही है। इसके तहत नागरिकों से स्वदेशी चीजों को खरीदने की पुरजोर अपील की जा रही है। सही मायने में यह मुहिम वक्त की जरूरत है।
चूंकि पूर्व में विदेशी सामान की जमकर खरीदारी कर हम दूसरे देशों की दीपावली मनाते रहे हैं। भारत के बाजारों में किसी भी त्योहार से पहले विदेशी उत्पादों का अथाह भंडार पहुंच जाता है। खासकर चाइनीज चीजें हरेक दुकान पर दिखाई देती रही हैं। एक समय था जब होली हो या दीपावली बाजारों में चाइनीज आइटम छाए रहते थे। इससे स्वदेशी दुकानदारों और कारोबारियों को मायूस होना पड़ता था। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें दीपावली पर स्वदेशी वस्तुओं की खरीद में दिलचस्पी लेनी चाहिए।
स्वदेशी चीजें क्यों हैं जरूरी
स्वदेशी चीजों की बिक्री बढ़ने से राष्ट्र को दोहरा लाभ मिलेगा। एक तो घरेलू बाजार को मजबूती मिलेगी दूसरा देश की अर्थव्यवस्था बेहतर होगी। दीपावली की खरीदारी करते समय उन छोटे दुकानदारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जो सड़क किनारे जगह-जगह सामान की बिक्री करने बैठे हैं। यदि उनका सामान बिकेगा तो उन्हें भी यह त्योहार हंसी-खुशी मनाने का अवसर मिल पाएगा। बड़ी संख्या में नागरिक बाजार का रुख करने की बजाए ऑनलाइन सामान की खरीदारी में दिलचस्पी दिखाते हैं। इससे छोटे दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ता है।
कुम्हारों को दीपावली में सहयोग कैसे करें
दीपावली पर मिट्टी के दीए जलाने का विशेष महत्व है। घरेलू सजावट का सामान व दीए आदि ऑनलाइन मंगवाने की बजाए पटरी दुकानदारों से खरीदे जाने चाहिए। आधुनिक दौर में कुम्हारी कला दम तोड़ रही है। मिट्टी के दीयों, घड़े, गुल्लक इत्यादि की खरीद अब पहले जैसी नहीं रह गई है। हालांकि इस कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार अपने स्तर से हर संभव प्रयास कर रही है।

trump india relations: दोस्त ऐसा, दुश्मन की जरूरत नहीं
देश की मिट्टी से निर्मित यह सामान घर की शोभा को बढ़ाते हैं। विदेश के मुकाबले स्वदेशी सामान थोड़े महंगे हो सकते हैं, मगर इन्हें खरीदने में हिचकना नहीं चाहिए। स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से इनके कारीगरों का मनोबल भी बढ़ेगा।
इस दिवाली इन 4 चीजों को गिफ्ट में न लें और न ही दें
भारतीय बाजार (Indian market) में त्योहारी सीजन (festival) के दौरान अपना सामान खपाने के लिए चीन जैसे देश कई-कई माह पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं। उन्हें मालूम होता है कि किस त्योहार पर कौन सी चीजें बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है। यह रणनीति अब स्वदेश में अपनाई जानी चाहिए। विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना भी आवश्यक है। इसमें सभी को सहयोग करना होगा।



