trump india relations: दोस्त ऐसा, दुश्मन की जरूरत नहीं

trump india relations: दोस्त यदि डोनाल्ड ट्रंप जैसे हों तो दुश्मनों की जरूरत नहीं है। यह बात सोलह आने सच है। अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यक्तित्व को समझना आसान नहीं है। वह अक्सर कहते कुछ हैं, करते कुछ और है। इसके चलते वैश्विक राजनीति में अमेरिकी राष्ट्रपति की स्वीकार्यता तथा विश्वसनीयता निरंतर कम हो रही है।
पिछले कुछ समय से वह अमेरिका के दुश्मनों से अधिक दोस्तों को परेशान करने पर आमादा हैं। एक तरफ वह भारत और प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते नहीं थकते, दूसरी ओर उन्होंने भारत विरोधी मुहिम छेड़ रखी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के नए दावे ने एकाएक सनसनी फैला दी है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है। ट्रंप के दावे पर यकीन करें तो भारत-रूस के बीच तेल की खरीद-फरोख्त जल्द रुक जाएगी। ट्रंप के ताजा बयान ने विपक्ष को पीएम के खिलाफ बोलने का मौका दे दिया है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा है कि पीएम मोदी ट्रंप से डरते हैं। वो ट्रंप को यह निर्णय लेने और घोषणा करने देते हैं कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा। वहीं, भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हमारी प्राथमिकता देश के नागरिक हैं, कुछ और नहीं। यानी सरकार ने ट्रंप के दावे को सख्ती के साथ खारिज कर दिया है। इसके पहले भारत-पाकिस्तान में संघर्ष विराम के मुद्दे पर भीद अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेतुके दावे किए थे। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को सबक सिखाया था।
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दोनों देशों में संघर्ष विराम होने पर अमेरिका राष्ट्रपति ने दावा किया था कि उनके दबाव के कारण भारत को युद्ध मैदान से पीछे हटना पड़ा। भारत यदि बात नहीं मानता तो अमेरिका उसके साथ व्यापार नहीं करता। ट्रंप के इस बयान पर भी भारत में खूब राजनीतिक बवंडर मचा था। दरअसल ट्रंप मनमाने फैसले लागू करने के लिए किसी भी हद तक जाते रहे हैं। इसके लिए वह दादागिरी तक से बाज नहीं आते।
भारत जैसे सहयोगी और मित्र देश को जिस तरीके से वह परेशान कर रहे हैं, उसका विरोध अमेरिका के भीतर भी देखने को मिल रहा है। भारत से ज्यादा पाकिस्तान को तवज्जो देकर उन्होंने नई दिल्ली को काफी नाराज कर रखा है। नोबेल शांति पुरस्कार पाने को वह जिस प्रकार छटपटाते दिखाई दिए थे, वह अमेरिका जैसे ताकतवर मुल्क के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति की छवि के कतई अनुकूल नहीं था।
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नोबेल पुरस्कार न मिलने पर ट्रंप की नाराजगी भी सामने आई। लोकप्रियता के लिहाज से आज वह पीएम मोदी से बेहद पीछे हैं। भारत और रूस की नजदीकी ट्रंप को परेशान करती है। रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के मकसद से वह उसके खरीदारों को तोड़ने की जुगत में लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर सौ प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर शी जिनपिंग को टेंशन दी है।
पीएम मोदी को लेकर ट्रंप के बेतुके दावों से बेशक भारत के विपक्षी दल प्रसन्नता का अहसास करें, मगर आम जनता का अपने पीएम पर अटूट भरोसा है। यह भरोसा इसलिए नहीं कि मोदी लोकप्रिय हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि उन्हें मालूम है कि मोदी के हाथों में देश सुरक्षित है। वह कभी देश विरोधी ताकतों के आगे नहीं झुक सकते हैं। तथ्यहीन बयान देकर डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ अपनी जगहंसाई करा रहे हैं। हालिया घटनाओं के चलते trump india के relations में अमेरिकी राष्ट्रपति की भूमिका एक बार फिर चर्चा का विषय बनी है।



