US Midterm Election Results: ट्रंप और नेतन्याहू को बड़ा झटका, क्या बदलने जा रहा है वैश्विक सत्ता का समीकरण?

US Midterm Election 2026: लोकतंत्र में वोट की ताकत सबसे बड़ी होती है। जनता जब किसी नेता को अर्श पर बिठाना जानती है, तो वक्त आने पर उसे फर्श पर लाने में भी देर नहीं लगाती। अमेरिका के ताजा मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने इस बात को फिर साबित कर दिया है। सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी को पछाड़ते हुए विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों में जबर्दस्त जीत दर्ज की है। इस करारी हार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गहरा राजनीतिक आघात दिया है। हालांकि ट्रंप ने नतीजों को स्वीकार कर लिया है, लेकिन उनकी बयानबाजी अब भी जारी है। उनका दावा है कि अगर बैलेट पेपर पर उनकी तस्वीर होती, तो देश में रिपब्लिकन पार्टी की एकतरफा आंधी चलती।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अपनी नीतियों की नाकामी को स्वीकार करने से बच रहे हैं। पिछले दो वर्षों के उनके आक्रामक फैसलों से देश और दुनिया में कई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। संयोग ऐसा है कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मजबूत जोड़ी एक साथ दबाव में आ गई है। उधर इजरायल के आम चुनाव में नेतन्याहू पूर्ण बहुमत हासिल करने से चूक गए, जहां करीब डेढ़ दर्जन सीटों वाले अरब दल अब किंगमेकर की हैसियत में आ खड़े हुए हैं। गठबंधन में सबसे आगे रहने के बाद भी नेतन्याहू के लिए सत्ता की राह बेहद पेचीदा हो गई है।
अमेरिका की बात करें तो विपक्षी डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों पर नियंत्रण से सीधे तौर पर राष्ट्रपति की कुर्सी तो नहीं जाएगी, लेकिन ट्रंप के एकतरफा फैसलों और कार्यकारी शक्तियों पर संसद की सख्त लगाम जरूर लग जाएगी। मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन की इस गिरावट के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर उपजा असंतोष माना जा रहा है। अमेरिका में महंगाई अपने चरम पर पहुंच चुकी है और आर्थिक मोर्चे पर जनता दबाव महसूस कर रही है। वहीं ईरान के साथ तल्खी, भारी युद्ध खर्च और आक्रामक विदेश नीति के चलते वैश्विक मंच पर अमेरिका की साख और खजाने दोनों को नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप की करारी हार से भारत की खुली लॉटरी; पेट्रोल-डीजल के दाम होंगे धड़ाम, जानें मिडटर्म नतीजों का बड़ा असर
वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच पिछले ढाई दशकों में जो रणनीतिक संतुलन बना था, उस पर भी ट्रंप की नीतियों का प्रतिकूल असर पड़ा है। इस हार के बाद भी ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि ट्रंप ईरान के खिलाफ इजरायल के साथ मिलकर सैन्य या कूटनीतिक दबाव को और तेज कर सकते हैं। दूसरी ओर, इस चुनावी जीत ने अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के दावे को बेहद मजबूत कर दिया है। अमेरिकी नतीजों की गूंज भारत के राजनीतिक गलियारों में भी सुनाई दे रही है, जहां विपक्षी खेमे और क्षेत्रीय संगठन इस चुनावी उलटफेर पर चुटकी लेते हुए चुनावी तंत्र की निष्पक्षता से जोड़कर तंज कस रहे हैं।



