India-Afghanistan Relations: अफगानिस्तान में अचानक क्यों बंद हुई पाकिस्तानी दवाएं, वजह है भारत
India-Afghanistan Relations: अफगानिस्तान में भारतीय दवाओं की बढ़ती मौजूदगी से आम लोगों को राहत मिली है। सीमा तनाव के बाद पाकिस्तानी दवाओं की जगह भारत बना भरोसेमंद विकल्प।
India-Afghanistan Relations: अफगानिस्तान के आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में इन दिनों एक बड़ा फर्क साफ दिखने लगा है। खास तौर पर स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों में। सोशल मीडिया पर सक्रिय अफगान ब्लॉगर फजल अफगान का अनुभव इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता है। सिरदर्द के लिए जब वह दवा लेने पहुंचे तो विदेशी ब्रांड की महंगी गोली की जगह उन्हें भारत में बनी वही दवा बेहद कम कीमत पर मिली। न सिर्फ खर्च घटा बल्कि राहत भी जल्दी मिली। यही अनुभव अब देश के हजारों लोगों का बनता जा रहा है।
आम जनता के लिए राहत की खबर
अफगान बाजारों में अब भारतीय दवाओं की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां ज्यादातर मेडिकल स्टोर पाकिस्तानी दवाओं पर निर्भर थे अब वहां भारत से आई दवाएं लोगों की पहली पसंद बन रही हैं। सस्ती कीमत और बेहतर असर ने आम मरीजों को सीधा फायदा पहुंचाया है।
लंबे समय तक अफगानिस्तान अपनी दवाओं की जरूरत के लिए पाकिस्तान पर निर्भर रहा। अनुमान के मुताबिक 70 से 80 प्रतिशत दवाएं वहीं से आती थीं। लेकिन अक्टूबर और नवंबर 2025 में सीमा पर हुए हिंसक टकराव के बाद हालात पलट गए। अफगान सरकार ने गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते हुए पाकिस्तानी दवाओं पर रोक लगा दी। इसके बाद तोरखम और चमन जैसे अहम व्यापारिक रास्ते बंद हो गए। नतीजा यह हुआ कि वैकल्पिक देशों की तलाश तेज हो गई।
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संकट में भारत ने की मदद
दवाओं की कमी के बीच भारत ने मानवीय आधार पर मदद पहुंचाई। नवंबर 2025 में 73 टन जीवन रक्षक दवाएं काबुल भेजी गईं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से अफगानिस्तान को 108 मिलियन डॉलर की दवाएं मिली थीं। वहीं 2025 के आखिरी महीनों में ही यह आंकड़ा 100 मिलियन डॉलर के पार चला गया। भारत का सहयोग केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। काबुल में बना 400 बेड का इंदिरा गांधी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल भी इसी साझेदारी का प्रतीक है।



