सियासत का ‘हाइड्रोजन बम’; वोट चोरी के आरोप पर राहुल का मास्टर स्ट्रोक या सियासी शोर

हाइड्रोजन बम आजकल सुर्खियों में छाया है। इसकी मारक क्षमता कल्पना से परे है। यह मानव और जीव-जंतुओं का अस्तित्व मिटाने के साथ-साथ प्रकृति को अपूर्णीय क्षति पहुंचाने की ताकत रखता है। जंग के मैदान में बाजी पलटने में हाइड्रोजन बम का कोई जवाब नहीं है। देश-दुनिया में इन दिनों परमाणु बम और हाइड्रोजन बम चर्चाओं का मुख्य विषय बन गया है। इस बीच सियासी मैदान में भी बम की एंट्री होना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को गंभीर आरोपों की आग में झुलसाने के लिए हाइड्रोजन बम का इस्तेमाल किया है। बिहार विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर ‘वोट चोरी’ की मुहिम को धार देने के मकसद से कांग्रेस के युवराज ने जो नया तरीका अपनाया है, उसने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
क्या राहुल का ये मास्टर स्ट्रोक सफल होगा
उन्होंने हरियाणा में वोट चोरी और फेक वोटर्स का डाटा सार्वजनिक कर एक बार फिर सरकार व चुनाव आयोग को सवालों के कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। कांग्रेस नेता काफी समय से आरोप लगा रहे हैं कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से एनडीए गठबंधन वोट चोरी कर चुनावों में धांधली कर रहा है। हरियाणा विस चुनाव में भी वोट चोरी व फेक वोटर्स के आधार पर कांग्रेस को सत्ता में आने से रोका गया था। बिहार विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर राहुल गांधी का यह ‘मास्टर स्ट्रोक’ मतदाताओं को रिझाने में कितना सफल हो पाएगा, यह तत्काल बताना संभव नहीं है।
बिहार में चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस के दम का पता चल पाएगा। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ मिलकर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को सीएम फेस मानने की कांग्रेस की अपनी मजबूरी है। चूंकि उसे इस राज्य में अपनी जमीनी हकीकत मालूम है। उधर, भाजपा ने पलटवार करने में देरी नहीं की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई पीपीटी बनाकर दे देता है और राहुल गांधी इसे दिखाकर भाग जाते हैं।
अक्सर सनसनीखेज शब्दों का प्रयोग करते हैं राहुल गांधी
वैसे वोट चोरी के मुद्दे पर जनता का ध्यान खींचने के लिए राहुल गांधी अक्सर सनसनीखेज शब्दों का प्रयोग करते हैं। इसलिए उन्होंने हाइड्रोजन बम शब्द का उल्लेख किया है। यह राहुल की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। असल मुद्दों को उठाने की बजाए पुराने मसलों को राजनीति के केंद्र में लाने की राहुल की यह रणनीति बिहार चुनाव में कांग्रेस को कितना लाभ पहुंचा पाएगी, यह देखना दिलचस्प रहेगा। एक सच्चाई यह भी है कि देश में राजनीतिक दलों और नेताओं की लोकप्रियता एवं स्वीकार्यता कम हो रही है।
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यही कारण है कि चुनावों में अब मुफ्त की रेवड़ियां बांटने का प्रचलन बढ़ गया है। मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, निःशुल्क राशन के अलावा महिलाओं को प्रतिमाह एकमुश्त राशि उपलब्ध कराने के चुनावी वादे देश की अर्थव्यवस्था की सेहत को बिगाड़ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अलावा खुद पीएम मोदी मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के प्रचलन पर चिंता जाहिर कर चुके हैं, मगर यह सिलसिला रूकने की बजाए बढ़ रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली की सत्ता पर दबदबा कायम रखने के लिए मुफ्त की रेवड़ियों का सहारा लिया था। आप का यह प्रयोग सफल रहा। इसके बाद से विभिन्न राजनीति दल यह हथकंडा अपना कर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं।



