तेजस्वी यादव का Triple M formula, क्या ये नीतीश को हराने के लिए काफी है

Triple M formula: बिहार की सत्ता से राजद 20 सालों से बाहर है और अपनी वापसी की हर संभव कोशिश में जुटी है। राजद के सियासी वनवास को खत्म करने का जिम्बा लालू यादव के सियासी वारिस माने जाने वाले तेजस्वी यादव के कंधे पर है। तेजस्वी पिछली बार सत्ता की दहलीज तक पहुंचते-पहुंचते रह गए थे। इस बार उनकी नजर ट्रिपल एम फैक्टर पर है जिसे साधकर वह बिहार के सिंहासन पर विराजमान हो सकते हैं।
सन् 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की लड़ाई नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। मगर जन स्वराज और एआईएमआईएम जैसे दल उसे त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। बिहार की सियासत में ट्रिपल एम फैक्टर काफी अहम है जिसे मुस्लिम महिला और मोस्ट बैकवर्ड यानी अति पिछड़ा वोटर के तौर पर देखा जाता है।
नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए से मुकाबला करने उतरे महागठबंधन के सीएम चेहरा तेजस्वी यादव की नजर ट्रिपल एम फैक्टर (Triple M formula) पर है। इन तीन वोट बैंक को साधे बिना तेजस्वी के लिए चुनावी जंग जीतना संभव नहीं है। क्योंकि नीतीश महिला और मोस्ट बैकवर्ड के जरिए 20 साल से सत्ता में बने हुए हैं। देखना है कि तेजस्वी सीएम की कुर्सी तक पहुंच पाते हैं या नहीं। बिहार में मुस्लिम वोटर काफी अहम माने जाते हैं।
किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं 18 प्रतिशत मुस्लिम
सूबे में करीबन 18% मुस्लिम आबादी है जो किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं। राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में से करीब 48 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वोटर्स हार जीत तय करते हैं। यह भी एम फैक्टर में से एक है। इसके बाद बिहार की सत्ता की दशा और दिशा महिला वोटर ही तय कर रही हैं। नीतीश कुमार इन्हीं महिला वोटरों के सहारे 20 साल से सत्ता में कायम है। बिहार की कुल आबादी में आधी भागीदारी रखने वाली यह महिला वोटर पैटर्न में पुरुषों से आगे नजर आती हैं।
बिहार चुनाव से दूरी क्यों बना रहे हैं राहुल गांधी, असल वजह क्या
यही वजह है कि बिना महिला वोटों को साधे बिना तेजस्वी यादव के लिए सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होना संभव नहीं होगा। आखिरी यह है बिहार की सियासत में मोस्ट बैकवर्ड को सबसे अहम फैक्टर माना जाता है। जिसे अति पिछड़ी जाति भी कहा जाता है। बिना इन्हें साधे सत्ता की दहलीज तक कोई भी दल नहीं पहुंच सकता। बिहार में मोस्ट बैकवर्ड आबादी 36% है जिसमें करीब 114 जातियां शामिल हैं।
इन लोगों के हाथ में सत्ता की चाबी
आबादी के लिहाज से यह कहा जा रहा है कि सत्ता की चाबी अब अति पिछड़ी जाति के हाथों में है। मोस्ट बैकवर्ड जातियों में केवट, लोहार, कुम्हार, कानू, धीमर, रैकवार, तुरहा, बाथम, मांझी, सहनी, प्रजापति, बढ़ई, सुनार, कहार, धानुक, नोनिया, राजभर, नाई, चंद्रवंशी, मल्लाह जैसी 114 जातियां आती हैं। इनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति कमजोर है। ये छोटी-छोटी जातियां जिनकी आबादी कम है मगर चुनाव में पिलर के तौर पर वे काफी अहम हो जाती है। इसलिए सभी दलों की कोशिश अति पिछड़ी जाति के वोटों को पाने की है।
राज्य में अति पिछड़ी जाति को साधकर ही नीतीश कुमार 20 सालों से सत्ता पर काबिज हैं। मगर अब उनकी पकड़ कमजोर पड़ी है। ऐसे में तेजस्वी अब इन्हें साधने की कवायद में है। इसीलिए तेजस्वी यादव ने निषाद समाज से आने वाले मुकेश सैनी को डिप्टी सीएम का चेहरा भी घोषित किया है।



