हमनें अपना प्रत्यक्ष प्रेरणापुंज खो दिया- संजय सिंह

सुलतानपुर। क्षत्रिय शिक्षा समिति जिसके अंतर्गत राणा प्रताप पी जी कॉलेज, राणा प्रताप विधि महाविद्यालय, महात्मा गाँधी स्मारक इंटरमीडिएट कॉलेज और धनञ्जय सिंह मेमोरियल जूनियर हाई स्कूल संचालित है। क्षत्रिय शिक्षा समिति के अध्यक्ष सजंज सिंह एडवोकेट के चाचा कमलेश सिंह उर्फ़ कमलेश दादा जो गंगा पुत्र की उपाधि से विभूषित थे, परलोकवासी हो गये। जो मूलतः महमूदपुर कटका में जन्में और पले बढ़े।
उन्होंने प्रयागराज को अपनी कर्मभूमि बनाया। चेतना और समाजसेवा की सशक्त सतंभ रहे गंगा पुत्र व दादा नाम से लोकप्रिय पूर्व सभासद कमलेश दादा के निधन से प्रयाग शहर शोकाकुल है। मृदुलता,सरलता, ईमानदारी और जनहित के कल्याण लिए समर्पित और अडिग संघर्ष की प्रतिमूर्ति रहे, कमलेश दादा तीन बार निर्दलीय पार्षद चुने गए और हमेशा जनता की आवाज़ को सबसे ऊँचे मंचों तक पहुँचाकर वास्तविक जनप्रतिनिधि की मिसाल बनें।
जीवनभर सेवा को ही साधना मानने वाले कमलेश दादा ने जीवित रहते नेत्रदान किया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय, प्रयागराज की विशेषज्ञ टीम पहुँची और अत्यंत कुशलता पूर्वक उनका नेत्र निकालकर आगे की प्रक्रिया पूरी की। कमलेश दादा ने देहदान का संकल्प भी लिया था, परंतु आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण देहदान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
कमलेश दादा ने समाज सेवा की सर्वोपरि रखा और विवाह नहीं किया था।परिवार का दायित्व और अंतिम संस्कार अंतिम समय में उनकी सेवा व देखभाल उनकी भांजी स्वाती (ममता) कर रही थीं। घाट पर आयोजित भावुक शोक सभा का संचालन वरिष्ठ सभासद शिवसेवक सिंह ने किया। दादा के संघर्ष, उनके बेबाक स्वभाव और बिना स्वार्थ वाली राजनीति की चर्चा करते हुए पूरे वातावरण को करुण और श्रद्धामय बना दिया। जिसमे शहर की राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक, न्यायिक धारा एक साथ मड़ पड़ी। महापौर गणेश केशरवानी ने कहा कि कमलेश दादा संगम के अस्तित्व पर संकट की समस्या मेरे सामने लेकर आये थे जिसके लिए जल मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को अग्रिम कार्यवाही के लिए वार्ता करके पत्र दिया हूँ ।
पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि हमने अपना एक कर्मयोगी खो दिया जो मेरे लिये ही नहीं प्रयागराज के लिए भी अपूर्णीय क्षति है। क्षत्रिय शिक्षा समिति के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा हमनें अपना प्रत्यक्ष प्रेरणापुंज खो दिया। उन्होनें गाँव समाज के समक्ष सेवा की मिसाल क़ायम की। गंगापुत्र हमें सेवा हेतु हरपाल प्रेरित करते रहेगें। कमलेश दादा के स्मृति में शोक सभा का आयोजन किया गया और शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया गया। सुलतानपुर से परिवार के सदस्य प्रयाग पहुँचे। अंतिम संस्कार के अवसर पर सैकड़ों समाजसेवी, व्यापारी, अधिवक्ता व नगरवासी उपस्थित रहे।



