सपा के ‘PDA’ फॉर्मूले की हवा निकालने भाजपा ने उतारा अपना सबसे बड़ा मोहरा, कानपुर से होगी शुरूआत

UP Vidhansabha Election 2027 : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। भाजपा अपने संगठन को और मजबूत करने के लिए जिलों में सक्रियता बढ़ा रही है। वहीं समाजवादी पार्टी अपने “पीडीए” यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को और धार देने में जुटी है।

इस बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी संगठन को जमीन पर मजबूत करने के लिए लगातार दौरे करने जा रहे हैं। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं की स्थिति समझना और आने वाले चुनाव के लिए मजबूत टीम तैयार करना है।

कानपुर से शुरू होगा संगठनात्मक दौरा

पंकज चौधरी 7 जून से अपने दौरे की शुरुआत कानपुर से करेंगे। इसके बाद वे कानपुर देहात, जालौन, झांसी, ललितपुर और औरैया जैसे जिलों में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।

इन बैठकों में संगठन की जमीनी स्थिति पर चर्चा होगी। साथ ही संभावित नामों और टीम गठन को लेकर भी राय ली जाएगी।

संगठन और सरकार के बीच तालमेल पर जोर

भाजपा आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर काम कर रही है। हाल के मंत्रिमंडल विस्तार को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पार्टी में विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। खासकर ओबीसी और अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े नेताओं को आगे लाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

सपा की पीडीए रणनीति और उसका असर

  • 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की पीडीए रणनीति काफी असरदार साबित हुई थी। पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 सीटें जीत ली थीं।
  • इन जीतों में ओबीसी समुदाय के सांसदों की बड़ी हिस्सेदारी रही। सपा ने जातीय संतुलन बनाकर कई सीटों पर मजबूत पकड़ बनाई थी।
  • लोकसभा परिणामों ने यह साफ किया कि यूपी की राजनीति में जातीय समीकरण अब भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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भाजपा की जवाबी रणनीति

भाजपा इस चुनौती का मुकाबला व्यापक हिंदू मतदाताओं के एकीकरण और अलग-अलग सामाजिक समूहों के संतुलन से करना चाहती है। पार्टी गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित समुदायों पर विशेष फोकस कर रही है।

साथ ही संगठन में ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाया जा रहा है जो विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व कर सकें। इसका उद्देश्य चुनावी आधार को और मजबूत करना है।

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