भारत को घेरने का त्रिकोणीय चक्रव्यूह? पाकिस्तान-बांग्लादेश के बाद अब तुर्की की ‘नापाक’ चाल

Pakistan Turkey drone deal: देश के समक्ष आंतरिक और बाहरी चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यह वाकई चिंता का विषय है। एक तरफ कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें समय-समय पर सिर उठाने का प्रयास करती हैं, दूसरी ओर कुछ मुल्क भारत के खिलाफ षडयंत्र रचने में मशगूल रहते हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश की भारत के साथ अदावत जगजाहिर है। पाकिस्तान को नापाक हरकतें करने का खामियाजा समय-समय पर भुगतना पड़ा है। मोदी सरकार ने उसे कुछ ऐसी डोज दे डाली हैं, जिनके असर से वह काबू में नजर आता है।

ऐसा प्रतीत होता है कि अगली बारी बांग्लादेश की है। तारिक रहमान सरकार जिस तरीके का बर्ताव कर रही है, वह नई दिल्ली को सोचने पर मजबूर कर रहा है। फिलहाल घुसपैठियों को लेकर तनातनी के हालात हैं। हालांकि ढाका को मालूम है कि भारत से उलझना उसके लिए कतई हितकारी नहीं है। पाकिस्तान-बांग्लादेश की बदली नीतियों को देखकर तुर्की अचानक जोश में आ गया है। वह पहले से भारत विरोधी मानसिकता से ग्रस्त रहा है। वह मौके का फायदा उठाने की फिराक में दिखाई देता है।

तुर्की की ‘डबल गेम’ और कश्मीर पर दोगला रुख

वैसे तो तुर्की यह कह रहा है कि भारत को उसके पाकिस्तान से रिश्तों की वजह से उससे दूरी नहीं बनानी चाहिए, मगर असली सवाल भरोसे का है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन कई बार खुलकर कश्मीर पर पाकिस्तान के समर्थन में बयान दे चुके हैं। तुर्की ने पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंध भी बेहद मजबूत कर लिए हैं। यही नहीं पिछले साल भारत और पाकिस्तान के मध्य सैन्य संघर्ष के दरम्यान तुर्की ने पाकिस्तान को रक्षा उपकरण और ड्रोन तक मुहैया कराए थे। भारत ने पाकिस्तान की ओर से आए जिन कई ड्रोन को मार गिराया था, उनमें तुर्की में बने ड्रोन भी शामिल थे।

भारत का ‘ऑपरेशन आर्मेनिया’: तुर्की को उसकी भाषा में जवाब

ऐसे में तुर्की का भारत से दोस्ती और संतुलन की बात करना नई दिल्ली को एक सोची समझी रणनीतिक चाल जैसा लगता है। नतीजन भारत भी अब तुर्की को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है। भारत ने पिछले कुछ समय में साइप्रस और ऑर्मेनिया के साथ अपने रक्षा संबंधों को तेजी से मजबूत किया है। ऑर्मेनिया अब भारतीय हथियारों का बड़ा खरीदार बन चुका है।

साइप्रस के साथ भी भारत रणनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। यह सीधे-सीधे तुर्की को संदेश है कि यदि अंकारा भारत के पड़ोस में दखल बढ़ाएगा, तो नई दिल्ली भी तुर्की के सामरिक क्षेत्र में जवाबी दबाव बनाएगी। जिस प्रकार तुर्की पाकिस्तान और अब बांग्लादेश के जरिए भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, उसी तरह भारत भी तुर्की के विरोधी या प्रतिस्पर्धी देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। यह नई शीत प्रतिद्वंद्विता का संकेत है। भारत के लिए यह समय बेहद सतर्क रहने का है।

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पाकिस्तान के साथ तुर्की की साझेदारी पहले ही चिंता का कारण थी, मगर अब यदि बांग्लादेश भी उसी धुरी का हिस्सा बनने लगता है, तो यह भारत की पूर्वी सुरक्षा संरचना के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। सनद रहे कि बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने कुछ साल पहले तुर्की का दौरा किया था। उस समय भारत और तुर्की के संबंध काफी खराब चल रहे थे। आमिर के तुर्की दौरे को लेकर देश में खास विरोध देखने को मिला था। अभिनेता को लंबे समय बाद अपनी गलती का अहसास हो गया था। कुल मिलाकर भारत को अपने दुश्मनों से सतर्क रहने की जरूरत है। दुश्मन घर का हो या बाहर का, नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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