Nepal Gen Z protest: काठमांडू में क्यों भड़के युवा और जानें क्या हैं उनकी मांगे

Nepal Gen Z protest: सोमवार को काठमांडू की सड़कों पर हजारों युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। ये विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (पूर्व में ट्विटर) को ब्लॉक करने के सरकारी आदेश के विरुद्ध था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ये प्लेटफॉर्म्स पंजीकरण कराने में नाकाम रहे हैं और सरकार के नियंत्रण में नहीं आए। हिंसक प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।

प्रदर्शनकारियों का उग्र विरोध (Nepal Gen Z protest)

जेनरेशन ज़ेड (1995 से 2010 के बीच जन्मे) के हजारों प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू की सड़कों पर आकर इस प्रतिबंध के विरुद्ध अपना गुस्सा जाहिर किया। वे कंटीले तारों को तोड़ते हुए संसद भवन के पास पहुंच गए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारें छोड़ीं, मगर प्रदर्शनकारियों की भारी संख्या के सामने पुलिस नतमस्तक हो गई और संसद परिसर में शरण लेनी पड़ी। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और सुरक्षा के मद्देनज़र काठमांडू में कर्फ्यू लगाया गया।

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सोशल मीडिया पर रोक के कारण विरोध (Nepal Gen Z protest)

प्रदर्शनकारी (Nepal Gen Z protest) सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं। उनका कहना है कि सरकार का यह कदम युवाओं को अपनी आवाज़ उठाने से रोकने की साज़िश है। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े और पुलिस से भिड़े, तब पुलिस को पानी की बौछारें और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। कुछ प्रदर्शनकारी कथित तौर पर संसद भवन में घुसने में भी कामयाब हुए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

सरकारी प्रतिबंध से नया विवाद

नेपाल सरकार ने अपने हालिया कदम से सोशल मीडिया कंपनियों पर दबाव डाला है। सरकार का कहना है कि जिन कंपनियों ने पंजीकरण के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं की, उन्हें ब्लॉक कर दिया जाएगा। सरकार ने 28 अगस्त को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पंजीकरण के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। मगर कई प्रमुख प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम इस आदेश को पूरा करने में असमर्थ रहे, जिसके बाद इन प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया गया।

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इस कदम को लेकर विपक्षी दलों और अधिकार संगठनों ने कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सरकार यह कदम विरोधियों की आवाज़ को दबाने और सेंसरशिप को बढ़ावा देने के लिए उठा रही है।

समाज में असंतोष और आक्रोश

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करना केवल एक शुरुआत है। वे इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं और उनकी मांग है कि इन प्लेटफॉर्म्स को फिर से बहाल किया जाए। प्रदर्शन के दौरान हिंसा और झड़पें बढ़ गईं, जिससे कई लोग घायल हो गए और पुलिस को फायरिंग तक करनी पड़ी। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक स्थानों पर सरकारी विरोधी नारे लगाए और कई जगहों पर तोड़फोड़ भी की।

काठमांडू में कर्फ्यू का विस्तार

काठमांडू में बढ़ते हुए प्रदर्शन और हिंसा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने कर्फ्यू को और कड़ा कर दिया। बाणेश्वर के इलाके में पहले से लागू कर्फ्यू को अब राजधानी के अन्य प्रमुख हिस्सों में भी बढ़ा दिया गया है। इसमें राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास, प्रधानमंत्री निवास और अन्य उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

क्या है सरकार की योजना?

सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को पंजीकरण के लिए दिए गए नोटिसों का पालन करना अनिवार्य है। मगर नागरिक समाज और विपक्षी दल इसे एक सख्त कदम मानते हैं। उनकी चिंता है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा। इससे पहले भी नेपाल सरकार ने कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाया था, जो बाद में हटा लिया गया था, जब इन कंपनियों ने स्थानीय कानूनों का पालन करने का वादा किया।

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