iran protest news: क्या ईरान में खत्म होगी कट्टरपंथ की सत्ता, डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से डरे खामेनेई
iran protest news: खुले बाल, मुंह में सिगरेट, दाएं हाथ में लाइटर और बाएं हाथ में जलती तस्वीर…। महज 35 सेकंड की यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से दुनिया भर के इस्लामिक मुल्कों में तहलका मच गया है। मॉडल सरीखी युवती की यह वीडियो और फोटो अशांत ईरान से सामने आई है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ विद्रोह की भड़की आग तेजी से फैल चुकी है।
सुप्रीम लीडर की तस्वीर फूंककर सिगरेट जलाने और कश फूंकने के बाद से अनाम लड़की सुर्खियों में है। लड़की की तलाश में ईरान की एजेंसियां ताबड़तोड़ दबिश दे रही हैं, मगर उन्हें अब तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है। वायरल वीडियो से साफ है कि संबंधित लड़की देश की मौजूदा सत्ता प्रणाली से कतई संतुष्ट नहीं है। वह बदलाव की पक्षधर है। कट्टर इस्लामी मुल्क ईरान में समय-समय पर इस प्रकार के अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आते रहे हैं, जिन्होंने समूची दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
क्या होगा ईरान का भविष्य
वहां का युवा पाबंदियों से बाहर आकर आधुनिक समाज के अनुरूप खुद को ढालने के लिए आतुर दिखाई देता है। इसके इतर खामेनेई सरकार को आधुनिकता पसंद नहीं है। ईरान का भविष्य क्या होगा? इसे लेकर निरंतर सवाल उठ रहे हैं। क्या सुप्रीम लीडर खामेनेई को सत्ता छोड़कर भागना पड़ेगा? क्या राजशाही की वापसी का समय आ चुका है? क्या अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमला बोल देंगे? सवाल अनेक हैं, मगर उनका जवाब मिलने में थोड़ा वक्त लग सकता है।
वैसे ईरान वाकई जल रहा है। हिंसा पर काबू पाने में सरकार असफल है। शहर-शहर में सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का हुजूम नजर आता है। बढ़ती महंगाई ने सत्ता विरोधी माहौल तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस बीच ईरान में सुप्रीम लीडर की तस्वीर जलाना गंभीर अपराध माना जाता है। सुप्रीम लीडर ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक प्रमुख माने जाते हैं।
क्या नॉर्थ कोरिया का भी होगा वेनेजुएला जैसा हाल, किम जोंग के नए बयान ने मचाई सनसनी
ऐसे में उन्हें चुनौती देना या उनकी तस्वीर जलाने का मतलब है कि सीधे ईरान को खुली चुनौती देना। सरेआम खामेनेई की तस्वीर जलाना और उससे सिगरेट के कश लेना यह अपने आप में सख्त संदेश है, जो ईरान की प्रदर्शनकारी महिलाओं की आवाज बन गई है। इस प्रकार के विरोध-प्रदर्शनों को नियंत्रित करना अधिकारियों के लिए कठिन है, क्योंकि ये बड़े जनसमूह पर निर्भर नहीं होते, जिन्हें तितर-बितर किया जा सके। रजा शाह पहलवी के शासनकाल में ईरान का समाज खुला था।
अमेरिका ने बढ़ा रखी है ईरानी लीडर की परेशानी
युवतियां तब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकती थीं। महिलाओं को सड़कों पर पश्चिमी शैली के कपड़े पहनने की आजादी थी। बाद में सत्ता परिवर्तन के साथ नई पाबंदियां लागू कर दी गईं। वह आज तक लागू हैं। इन पाबंदियों के विरोध में महिलाएं समय-समय पर आवाज उठाती रही हैं। अमेरिका के सख्त रुख ने भी ईरान के सुप्रीम लीडर की परेशानी बढ़ा रखी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं। जानकारों का मानना है कि ईरान के युवाओं पर सऊदी अरब में बदलते माहौल ने भी असर डाला है। दरअसल सऊदी अरब ने पिछले कुछ साल में महिलाओं के प्रति नरम रुख अपनाया है। वहां महिलाओं को धीरे-धीरे पाबंदियों में छूट दी जा रही है। काफी समय पहले जब वहां फैशन शो का आयोजन किया गया था तो कई इस्मालिक देशों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी, मगर अरब पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था।



