भारत को चुनौती देने वाले इस इस्लामिक देश की सीमा पर अब भारतीय मिसाइलें देंगी पहरा

भारत ने अब तुर्की को एक सबक सिखाया है—एक ऐसा देश जिसने भारत के प्रति शत्रुता रखी है और पाकिस्तान का साथ दिया है, खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान। तुर्की के मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया है कि अब भूमध्य सागर में तुर्की की सीमाओं के पास भारतीय मिसाइलें और ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं। यह दावा तुर्की की समाचार एजेंसी TR Haber ने पिछले हफ्ते भारत और साइप्रस के बीच हुए एक रक्षा समझौते के बाद किया।
साइप्रस और भारत के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत कथित तौर पर पूर्वी भूमध्य क्षेत्र में भारतीय मिसाइलें और ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और साइप्रस अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमत हुए हैं।
दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के लिए पांच साल का रोडमैप (2026-2031) जारी किया है। इस योजना में साइबर सुरक्षा पर चर्चा शुरू करने के साथ-साथ समुद्री परिवहन, अंतरिक्ष और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के निर्णय शामिल हैं। ये निर्णय शुक्रवार को राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के बीच हुई एक बैठक के दौरान लिए गए। तुर्की के मीडिया आउटलेट्स इस समझौते को अपने देश के खिलाफ उठाया गया कदम बता रहे हैं।
भारत-साइप्रस समझौते ने तुर्की की चिंताओं को क्यों बढ़ा दिया है?
भारत और साइप्रस ने कुल छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें आतंकवाद-रोधी उपायों, राजनयिक प्रशिक्षण, नवाचार और प्रौद्योगिकी पर एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना, खोज और बचाव (SAR) अभियानों के लिए आधिकारिक समन्वय और सहयोग तंत्र का निर्माण, और उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा संस्कृति (2026–2030) के क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े समझौते शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही दोनों देशों ने सार्वजनिक रूप से किसी रक्षा समझौते पर स्पष्ट रूप से चर्चा नहीं की, लेकिन तुर्की पूर्वी भूमध्य क्षेत्र के संबंध में भारत के इरादों से अच्छी तरह वाकिफ है। एक दिन पहले, साइप्रस के मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया था कि साइप्रस के अधिकारियों ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइलों और आकाश वायु रक्षा प्रणाली की संभावित खरीद के संबंध में चर्चा की थी। तुर्की के मीडिया आउटलेट्स ने भी इस दावे की पुष्टि की है।
भूमध्य सागर में तुर्की की घेराबंदी
भारत—ग्रीस और साइप्रस के सहयोग से—तुर्की के प्रभाव क्षेत्र (भूमध्य सागर) के भीतर अपनी रणनीतिक उपस्थिति का विस्तार कर रहा है। तुर्की के विश्लेषक इस घटनाक्रम को अपने देश के खिलाफ निर्देशित पश्चिमी और भारतीय “घेराबंदी” के रूप में देखते हैं। तुर्की मीडिया ने इस तथ्य को भी उजागर किया है कि साइप्रस अब भारत से युद्ध के लिए तैयार सैन्य हार्डवेयर—जैसे ड्रोन, मिसाइलें (ब्रह्मोस), और वायु रक्षा प्रणालियाँ—खरीदने की योजना बना रहा है।
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तुर्की एकमात्र ऐसा देश है जो उत्तरी साइप्रस के तुर्की गणराज्य (TRNC) को मान्यता देता है। साइप्रस की अपनी यात्रा के दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री ने साइप्रस की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए खुले तौर पर समर्थन व्यक्त किया—एक ऐसा रुख जिसे तुर्की मीडिया ने अंकारा की स्थिति के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा। जब पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी ने साइप्रस का दौरा किया था, तो तुर्की मीडिया ने अटकलें लगाई थीं कि भारत का यह कदम तुर्की द्वारा पाकिस्तान को दिए गए सैन्य और राजनयिक समर्थन का एक कड़ा जवाब था।



