हर साल सैकड़ों जानें जाती हैं, ड्रंक ड्राइविंग की कड़ी सजा क्यों जरूरी

drunk driver accident: शराब पीकर गाड़ी न चलाएं…। शराब पीकर गाड़ी चलाना अपराध है…। मुख्य मार्गों पर जगह-जगह यह स्लोगन नजर आना आम बात है। वाहन चालकों को जागरूक और सचेत करने के लिए यातायात पुलिस इस प्रकार के स्लोगन का सहारा लेती है।

प्रतिवर्ष होली एवं दीपावली पर्व के मौके पर ड्रंक ड्राइवरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाता है। चेकिंग के दौरान जांच में शराब के सेवन की पुष्टि होने पर चालान व जुर्माने की कार्रवाई होती है। इसके बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं आता। हैदराबाद के कुरनूल में सवारी बस में भीषण आग लगने और बीस यात्रियों की मौत होने के बाद से ड्रंक ड्राइवरों को लेकर हंगामा मच रहा है। इस भयावह हादसे पर हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी सी सज्जनार का बयान सुर्खियों में है।

नशे में गाड़ी चलाना आतंकवाद फैलाने से कम नहीं

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा है कि नशे में गाड़ी चलाना आतंकवाद फैलाने से कम नहीं है। ड्रंक ड्राइवर आतंकी होते हैं। उन्हें न अपनी जिंदगी की फ्रिक होती है, न दूसरों की। ड्रंक ड्राइवर जीवन, परिवार और भविष्य को बर्बाद कर देते हैं। ऐसे कृत्यों को कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस कमिश्नर सज्जनार के गुस्से को समझना आसान है। दरअसल बस में सवार यात्रियों की जिंदा जलकर मौत न हुई होती, यदि बाइक अचानक बस से आकर न टकराती। नशे की हालत में बाइक सवार युवक बस के पहिए के नीचे आ गया था।

हर साल ड्रंक ड्राइवरों के कारण होते हैं हादसे

नतीजन जरा सी देर में यात्री बस आग का गोला बन गई। शुरुआत में बस चालक को दोषी माना जा रहा था, मगर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे सच्चाई सामने आती गई। देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। हर साल ड्रंक ड्राइवरों के कारण अनेक जानलेवा हादसे (drunk driver accident) होते हैं। स्कूटी, बाइक, मिनी बस, बस, ट्रक, ट्रैक्टर आदि के वाहन चालक नशे में होश खाकर गंभीर दुर्घटना को जन्म देते रहते हैं।

देश में ड्रंक ड्राइविंग के कई चर्चित केस देखने को मिल चुके हैं। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान पर भी शराब पीकर गाड़ी चलाने और फुटपाथ पर सोए कुछ नागरिकों को कुचल देने का आरोप लगा था। इस केस पर खासा बवाल मचा था। ड्रंक ड्राइविंग रोकने के लिए पुलिस बेशक नियमित रूप से कार्रवाई करे, मगर यह विकट समस्या आसानी से दूर होना संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक वाहन चालक को अपनी जिम्मेदारी को भली-भांति समझना होगा। हैदराबाद पुलिस की तर्ज पर प्रत्येक शहर में पुलिस को ड्रंक ड्राइविंग पर प्रतिबंध लगाने के मकसद से जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए।

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शराब पीकर फर्राटा वाहन चलाने पर संबंधित चालक का डीएल निरस्त करने की कार्रवाई भी की जानी चाहिए। वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर वर्कशॉप आयोजित की जाएं। वर्कशॉप में चालकों को ड्रंक ड्राइविंग के खतरनाक परिणाम से अवगत कराया जाए। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओं में साढ़े चार सौ से अधिक नागरिक जान गंवा देते हैं। सैकड़ों की संख्या में नागरिक घायल होते हैं।

भारत में दुनिया की सिर्फ एक प्रतिशत गाड़ियां हैं। इसके बावजूद यहां विश्व की दस प्रतिशत से ज्यादा दुर्घटना होना वाकई चिंताजनक है। हैदराबाद में दुर्घटना के बाद आग के गोले में तब्दील बस के फोटो व वीडियो देखकर दिल बैठ जाता है। हादसे में जान गंवा बैठे नागरिकों को ऐसे जुर्म की सजा मिली, जो उन्होंने किया नहीं था। देश में इस प्रकार के हादसे की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

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