कहीं आपकी रसोई का तेल भी तो नहीं बन रहा ‘धीमा जहर’, 90% घरों में होती हैं ये 5 जानलेवा गलतियां

Cooking Oil Mistakes: रसोई में रोजाना तैयार होने वाले भोजन का स्वाद और हमारी सेहत काफी हद तक इस्तेमाल किए जाने वाले कुकिंग ऑयल पर निर्भर करती है। अक्सर लोग बाजार से महंगे ब्रांड और बेहतर क्वालिटी का तेल तो खरीद लाते हैं, मगर स्टोरेज और पकाने के दौरान कुछ बुनियादी लापरवाहियां बरत बैठते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. शालिनी सिंह सालुंके के अनुसार, देश के लगभग 90 प्रतिशत घरों में कुकिंग ऑयल से जुड़ी पांच बड़ी गलतियां आम हैं, जो धीरे-धीरे अच्छे तेल को भी धीमे जहर में तब्दील कर देती हैं और लंबे समय में दिल, लिवर और पाचन से जुड़ी गंभीर बीमारियों का सबब बनती हैं।
सबसे आम चूक तेल के स्टोरेज को लेकर होती है, जहां ज्यादातर लोग तेल को उसी प्लास्टिक की थैली या सामान्य प्लास्टिक की बोतलों में रहने देते हैं। प्लास्टिक के संपर्क में रहने से हानिकारक केमिकल्स तेल में घुलकर लीच होने लगते हैं, जो शरीर में विषाक्तता पैदा करते हैं; ऐसे में तेल को हमेशा सुरक्षित स्टील या गहरे कांच के बर्तनों में ही रखना चाहिए।
दूसरी बड़ी गलती तेल को रसोई की खिड़की या ऐसी जगह रखना है जहां सीधी धूप और गर्माहट आती हो। तेज रोशनी और उच्च तापमान से तेल में ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया बेहद तेज हो जाती है, जिससे तेल खराब होने लगता है। लिहाजा इसे हमेशा किसी ठंडी, सूखी और अंधेरी कैबिनेट में ही स्टोर करना चाहिए।
खाना पकाते समय आंच का प्रबंधन और तेल को बार-बार खौलाना सेहत के लिए सबसे घातक साबित होता है। तेज आंच पर पकाने से तेल तुरंत अपने स्मोक प्वाइंट तक पहुंच जाता है, जिससे उसमें ट्रांस फैट और फ्री रेडिकल्स जैसे हानिकारक तत्व विकसित हो जाते हैं, इसलिए हमेशा मध्यम आंच पर ही खाना पकाएं और तले हुए तेल को दोबारा इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचें।
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इसके अलावा सालों-साल एक ही तेल का सेवन करने की आदत भी गलत है; शरीर को सभी जरूरी फैटी एसिड्स मिल सकें इसके लिए हर दो से तीन महीने में सरसों, मूंगफली, तिल और सूरजमुखी के तेल को बदलते रहना चाहिए।
वहीं, अत्यधिक केमिकल और उच्च तापमान पर तैयार किए जाने वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड रिफाइंड तेल की जगह शुद्ध कोल्ड प्रेस्ड या वुड प्रेस्ड (कच्ची घानी) तेल को ही प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि तेल के कुदरती पोषक तत्व पूरी तरह सुरक्षित रहें।



