Navratri: कुलदेवी की मन्नत भूल गए हैं? नवरात्रि में करें ये अचूक उपाय, दूर होगा हर दोष

navratri kuldevi puja vidhi: अक्सर, मुश्किल समय में परिवार में बीमारी के दौरान, या किसी ज़रूरी काम को पूरा करने की कोशिश करते समय, हम अपनी कुलदेवी (कुलस्वामीनी) या अपने आराध्य देवता से पूरी श्रद्धा के साथ कोई मन्नत (नवस) मांगते हैं। काम पूरा हो जाता है और संकट टल जाता है; मगर रोज़मर्रा की भागदौड़, भूलने की आदत या दूसरी रुकावटों के कारण, हम कभी-कभी अपनी मानी हुई मन्नत पूरी नहीं कर पाते। बाद में, जब अचानक कोई मुश्किल आती है या उस मन्नत की याद आती है, तो मन में एक अजीब सा डर और बहुत ज़्यादा पछतावा होने लगता है। मन में यह सवाल उठता है: “क्या यह संकट इसलिए आया क्योंकि मैं वह मन्नत पूरी नहीं कर पाया?”

अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो नवरात्रि का पवित्र समय इस पछतावे को दूर करने और अपनी कुलदेवी की कृपा पाने का सबसे अच्छा मौका है। आइए, मशहूर ज्योतिषी शिरीष कुलकर्णी की सलाह के आधार पर विस्तार से जानते हैं कि ऐसी स्थितियों में क्या करना चाहिए।

1. अगर आपको अपनी मन्नत ठीक-ठीक याद है…

अगर आपको ठीक-ठीक याद है कि आपने क्या मन्नत मांगी थी—जैसे साड़ी और चोली (पारंपरिक पहनावा) चढ़ाना, पेड़े (मिठाई) बांटना, पैदल तीर्थयात्रा (वारी) करना या कोई खास पूजा करना—तो इस नवरात्रि के दौरान बिना किसी देरी के उस मन्नत को पूरा करें।

2. क्या करें अगर आपने मन्नत तो मांगी थी, मगर ठीक-ठीक याद नहीं कि वह क्या थी?

अक्सर ऐसा होता है कि लोगों को मन्नत मांगने की बात तो याद रहती है, मगर उसकी खास बातें याद नहीं रहतीं। ऐसे मामलों में, लगातार मानसिक बेचैनी में रहने के बजाय, शास्त्रों में बताए गए इन उपायों को अपनाना चाहिए:

अपनी कुलदेवी के दर्शन करें: अगर हो सके, तो नवरात्रि के दौरान अपनी कुलदेवी के मूल स्थान (मूल पीठ) या मुख्य मंदिर में जाकर दर्शन करें। ओटी भरने की रस्म ठीक से निभाएं: देवी को पारंपरिक ब्लाउज़ का कपड़ा (खान), साड़ी, हरी चूड़ियाँ, हल्दी-कुमकुम, सुपारी, सिक्का और नारियल चढ़ाएं और पूरी श्रद्धा के साथ ओटी की रस्म पूरी करें।

11 दिसंबर को मीन राशि में मार्गी होंगे शनि देव, वृषभ और मकर समेत इन 4 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते

सुहाग की निशानी (सौभाग्य के गहने) चढ़ाएं: वैवाहिक सुख की प्रतीक चीज़ें—जैसे मंगलसूत्र, बिछिया (जोडवी), नथ या चूड़ियाँ—श्रद्धापूर्वक देवी के चरणों में अर्पित करें।

ज़रूरतमंदों को भोजन और मदद दें: अपनी क्षमता के अनुसार, गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को भोजन या कपड़े दान करें, या भूखों को खाना खिलाएं। मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है।

3. अगर मूल मंदिर जाना संभव न हो तो क्या करें?

अगर किसी वजह से अपनी कुलस्वामिनी (कुल की देवी) के पैतृक गाँव या तीर्थ स्थल पर जाना तुरंत संभव न हो, तो नवरात्रि के दौरान घर पर की गई घटस्थापना या देवी की टक (धातु की पवित्र पट्टिका) या मूर्ति के सामने श्रद्धापूर्वक नमन करें। उनकी प्रतिमा की विधि-विधान से पूजा करें, ऊपर बताई गई चीज़ें उनके चरणों में अर्पित करें और जब भी हालात ठीक हों, तब मूल मंदिर जाने का संकल्प लें।

Related Articles

Back to top button