150 सीटों पर कांग्रेस की नजर, अखिलेश का ये ‘जीत वाला फॉर्मूला’ बिगाड़ सकता है गणित

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी शुरुआती दौर में हैं, लेकिन विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में साथ उतरकर बेहतर प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच अब विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग रणनीति सामने आ रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों दल कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और उम्मीदवार तय करने का आधार क्या होगा।

इस बीच रायबरेली में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की गतिविधि और कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने दोनों दलों के बीच चल रही बातचीत को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।

कांग्रेस की नजर 150 से ज्यादा सीटों पर

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में 2017 के सीट बंटवारे को आधार बनाकर 150 से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी रख सकती है। पार्टी के भीतर यह तर्क दिया जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति में बदलाव आया है। राहुल गांधी की सक्रियता को भी पार्टी अपने बढ़े प्रभाव से जोड़कर देख रही है।

दूसरी ओर सपा संगठन प्रदेश की बड़ी संख्या में सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटा है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को कार्यकर्ताओं के बीच लगातार चर्चा का विषय बना रहे हैं। ऐसे में सीटों के बंटवारे में सपा की ओर से बड़े स्तर पर समझौते की गुंजाइश कितनी होगी। इस पर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

रायबरेली से अखिलेश ने दिया सीट बंटवारे का संकेत

सीटों को लेकर चल रही चर्चा के बीच अखिलेश यादव का रायबरेली दौरा राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। उन्होंने यहां पीडीए रथ यात्रा के जरिए संगठन और सामाजिक समीकरणों पर जोर दिया।

अखिलेश यादव ने सीटों के बंटवारे को लेकर यह रुख रखा कि गठबंधन में सीटों की संख्या ही सबसे बड़ा आधार नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक जिस सीट पर जिस दल या उम्मीदवार के जीतने की संभावना अधिक होगी। वहां उसी को मौका मिलना चाहिए।

इस बयान को सपा की संभावित चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी का संकेत है कि सीटों का फैसला केवल पुराने फॉर्मूले के आधार पर नहीं बल्कि स्थानीय चुनावी स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाए।

कांग्रेस ने भी दिखाए तेवर

रायबरेली में सपा की सक्रियता पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने अखिलेश यादव की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी की राष्ट्रीय भूमिका का उल्लेख किया।

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अजय राय ने कहा कि यदि सपा रायबरेली में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रही है तो कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी के मजबूत इलाकों में जाकर अपना संगठन मजबूत करेगी। उन्होंने कन्नौज, सैफई और इटावा में कार्यक्रम और रैलियां करने की बात कही।

इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि दोनों दलों के बीच सिर्फ सीटों की संख्या ही मुद्दा नहीं है। चुनाव से पहले अपने-अपने संगठन और प्रभाव वाले क्षेत्रों में राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना भी दोनों पार्टियों की रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है।

2024 के बाद बदले समीकरण पर नजर

2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के सामने अलग तरह की चुनौती है। उन्हें एक तरफ बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता बनाए रखनी है। दूसरी तरफ अपने-अपने संगठन और चुनावी हितों को भी सुरक्षित रखना है।

आने वाले समय में सीटों का बंटवारा किस फॉर्मूले से होता है। यह गठबंधन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। फिलहाल रायबरेली से लेकर कन्नौज और सैफई तक दोनों दलों की गतिविधियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि 2027 की चुनावी तैयारी में संगठनात्मक ताकत दिखाने की होड़ भी तेज हो गई है।

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