यूपी BJP में ‘गृहयुद्ध’, क्षत्रिय vs ब्राह्मण की जंग ने हिलाया लखनऊ का सिंहासन

उत्तर प्रदेश सरकार के भीतर क्या आपसी खींचतान चल रही है? क्या क्षत्रिय vs ब्राह्मण विधायकों में वर्चस्व की जंग छिड़ चुकी है? क्या निकट भविष्य में कोई बड़ा सियासी धमाका होने की संभावना है? राजधानी लखनऊ में भाजपा के क्षत्रिय और ब्राह्मण विधायकों की अलग-अलग मीटिंग ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
ऐसे में विपक्ष ने तंज कसने में देर नहीं की है। विपक्ष अलग राग अलाप रहा है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दरम्यान सत्ता पक्ष के क्षत्रिय और ब्राह्मण विधायकों का अलग-अलग जुटना तथा विचार-मंथन करना चर्चाओं में है। सियासी गलियारों में इसे ठाकुर बनाम ब्राह्मण के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा है कि दोनों समुदाय के विधायकों ने शक्ति प्रदर्शन का प्रयास किया है। हालांकि किसी भी गुट ने इस कदम को शक्ति प्रदर्शन की संज्ञा नहीं दी है। योगी सरकार में आंतरिक कलह से जुड़ी खबरें अक्सर सामने आती रही हैं।
कहा जाता है कि क्षत्रिय विधायकों को ज्यादा तवज्जो, मान-सम्मान व पावर मिली है। इसके चलते बाकी समुदायों के विधायक खुद को असहज महसूस करते रहे हैं। हालांकि सच्चाई क्या है, यह वही जानते हैं, जो इस प्रकार की खबरों को बढ़ावा देते हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच खटपट होने की खबरें कई बार सुनने को मिली हैं। भगवान राम की नगरी अयोध्या में कुछ माह पहले भव्य आयोजन के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का अनुपस्थित रहना भी चर्चाओं में रहा था।
यदि धुआं उठ रहा है तो आग भी लगी होगी
पुरानी कहावत है, ‘यदि धुआं उठ रहा है तो आग भी लगी होगी’। अलबत्ता भाजपा के क्षत्रिय और ब्राह्मण विधायक अगर अलग-अलग मंत्रणा करेंगे तो बात दूर तक जाना स्वाभाविक है। ऐसे में विपक्ष को बोलने का मौका मिल जाता है। विपक्ष पहले भी यह आरोप लगाता रहा है कि यूपी सरकार में क्षत्रियों को अधिक तवज्जो मिल रही है। याद रहे कि भाजपा विधायक और मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने इस साल की शुरुआत में अकबरपुर पुलिस स्टेशन के बाहर समर्थकों संग धरना दिया था।
यूपी की सियासत में फिर लौटा ‘ब्राह्मण कार्ड’, शिवपाल के बयान ने मचाई सनसनी
उन्होंने आरोप मढ़ा था कि सूबे में ब्राह्मणों को सम्मान नहीं मिल रहा है। मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि ब्राह्मण समाज ने देवेंद्र को वोट दिए थे, मगर वह उनके लिए खड़े होकर आवाज नहीं उठाते हैं। ब्राह्मण विधायकों एवं एमएलसी की मीटिंग पर विपक्ष ने नया शिगूफा छोड़कर चर्चाओं को बल दे दिया है। विपक्ष का कहना है कि भाजपा के ब्राह्मण विधायकों में असंतोष बढ़ रहा है। वे असहाय और अपमानित महसूस कर रहे हैं। इसलिए उन्हें भविष्य की योजना बनाने के लिए एकजुट होना पड़ा है। इस बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद ने मामले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसे जाति या किसी अन्य दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
जब भी विधायक विधानसभा सत्र के लिए लखनऊ आते हैं, वे एक-दूसरे से मिलते हैं। बहरहाल यह मामला भाजपा की बेचैनी बढ़ाने वाला नजर आता है। सीएम योगी आदित्यनाथ की तरफ से इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। याद रहे कि अपराधी अनिल दुबे के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के बाद भी यूपी में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई थी कि सरकार जानबूझकर ब्राह्मणों को निशाना बना रही है। विपक्ष ने भी उस समय काफी हल्ला मचाया था।



