यूपी की सियासत में फिर लौटा ‘ब्राह्मण कार्ड’, शिवपाल के बयान ने मचाई सनसनी

यूपी की सियासत में जातिगत समीकरण हमेशा से ही हार-जीत का मुख्य आधार रहे हैं। लखनऊ के गलियारों में कल शाम एक ऐसी हलचल हुई जिसने सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच भाजपा और उसके सहयोगी दलों के करीब एक दर्जन ब्राह्मण विधायक एक छत के नीचे जमा हुए। कहने को तो यह सिर्फ एक ‘सहभोज’ था मगर इसके पीछे की रणनीति 2027 के विधानसभा चुनावों की इबारत लिखती नजर आ रही है।
कुशीनगर से लखनऊ तक की जुटान
ये पूरी बैठक कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर आयोजित की गई। इस बैठक की खास बात यह थी कि इसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के कद्दावर चेहरों ने शिरकत की। शलभ मणि त्रिपाठी रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी जैसे नेता वहां मौजूद थे जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है। शुरुआत में तो सभी नेताओं ने इसे एक साधारण मेल-मिलाप बताया मगर बातों ही बातों में असली मकसद सामने आ ही गया।
नाराजगी दूर करने और एकजुटता का मंत्र
बदलापुर से विधायक रमेश मिश्रा ने इस मुलाकात की असली वजह पर रोशनी डाली। उन्होंने साफ किया कि यह बैठक सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं थी। दरअसल भाजपा का फोकस उन ब्राह्मण मतदाताओं को फिर से लामबंद करना है जो किसी वजह से सरकार या अधिकारियों के रवैये से नाराज चल रहे हैं। बैठक में इस बात पर भी मंथन हुआ कि अगर अधिकारी विधायकों की बात नहीं सुन रहे हैं तो उसे सामूहिक रूप से कैसे सुलझाया जाए। रमेश मिश्रा ने आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि मकर संक्रांति से पहले एक बार फिर सभी ब्राह्मण विधायक बैठकर भाजपा को और मजबूत करने की रणनीति बनाएंगे।
चर्चा में शिवपाल यादव का पलटवार
जैसे ही भाजपा विधायकों की इस गुप्त बैठक की तस्वीरें बाहर आईं समाजवादी पार्टी ने हमला बोलने में देर नहीं की। सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने इसे भाजपा की ‘बांटने वाली राजनीति’ करार दिया।
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शिवपाल ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा हमेशा से ही जातियों में बंटवारा करके अपना फायदा देखती आई है। उन्होंने भाजपा के ब्राह्मण विधायकों को एक खुला ऑफर भी दे डाला। शिवपाल ने कहा कि अगर भाजपा में सम्मान नहीं मिल रहा है तो वे बेझिझक समाजवादी पार्टी में आ सकते हैं। वहां उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा।



