संसद में मचा हड़कंप! 39 साल बाद फिर आया स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव, क्या चली जाएगी ओम बिरला की कुर्सी

भारत की सियासत में एक और नया विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। मंगलवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के नेतृत्व में ये प्रस्ताव लोकसभा सचिवालय में दाखिल किया गया, जिसमें कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। ये कदम संसद में बढ़ते असहमति और गतिरोध के बीच उठाया गया है। हालांकि इस प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थन शामिल नहीं है।

विपक्ष का आरोप और संसद में तनाव

विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर सदन के भीतर विपक्षी नेताओं की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सेना के पूर्व प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर अपनी नाराजगी जताई थी। इसके साथ साथ आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित करने और अन्य मुद्दों पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्षी दलों का कहना है कि सत्ता पक्ष को पूरी छूट दी जा रही है, वहीं विपक्ष को बोलने का मौका नहीं मिल रहा।

विपक्षी दलों की एकजुटता

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और अन्य कई सियासी पार्टियों के सांसदों ने मिलकर इस अविश्वास प्रस्ताव पर दस्तखत किए हैं। ये प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया है, जो स्पीकर के विरुद्ध प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया से संबंधित है।

स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया

लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के कार्यप्रणाली नियमों का पालन करना होता है। यदि ये प्रस्ताव संसद में बहुमत से पास हो जाता है, तो स्पीकर को पद से हटा दिया जाएगा। इस प्रस्ताव में स्पीकर के विरुद्ध आरोपों को स्पष्ट रूप से रखा जाता है और इसमें कोई पूर्वधारणा या अनुमान नहीं होता।

अपनी ही ‘शादी’ का कार्ड देखकर एक नेता के पसीने छूट गए; हाथ जोड़कर रिश्तेदारों से की ये रिक्वेस्ट

लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रस्ताव लाने की तारीख निर्धारित की जाती है। नोटिस प्राप्त होने के बाद 14 दिनों के अंदर ये तारीख तय करनी होती है। प्रस्ताव को कम से कम 50 सांसदों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।

क्या ये प्रस्ताव सफल होगा?

लोकसभा में ऐसा प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया अब तक केवल तीन बार देखने को मिली है। पहला मामला 18 दिसंबर 1954 का था, जब तत्कालीन स्पीकर जीवी मावलंकर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था। इस प्रस्ताव को बहस के बाद खारिज कर दिया गया था। दूसरा मामला 24 नवंबर 1966 का था, जब स्पीकर हुकम सिंह के विरुद्ध प्रस्ताव लाया गया, मगर उस प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और वह गिर गया। तीसरा और आखिरी मामला 15 अप्रैल 1987 का था, जब बलराम झाकड़ के विरुद्ध प्रस्ताव पेश किया गया था, मगर ये भी बहस के बाद खारिज हो गया।

Related Articles

Back to top button