सलमान खान वाली ‘पुरानी साजिश’: शिवम मिश्रा को बचाने के लिए लाया गया ‘फेक ड्राइवर’, पुलिस ने ऐसे खोली पोल

दौलत और शौहरत का नशा अक्सर सिर चढ़कर बोलता है। ऐसे में अहंकार से घिरने पर इंसान कभी जानबूझकर तो कभी अंजाने में बड़ी गलती कर बैठता है। बाद में सिवाए पछतावे के कुछ हासिल नहीं होता है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में लैंबॉर्गिनी रेवोल्टा कार हादसे ने एक बार फिर बिगड़ैल रईसजादों की खराब लाइफ स्टाइल को उजागर किया है। तम्बाकू कारोबारी केके मिश्रा के फरार बेटे शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि कानून तोड़कर भागने से मुसीबत पीछा नहीं छोड़ती। पैसा और पावर होने से मनमानी करने की छूट नहीं मिल जाती है।

लैंबॉर्गिनी कार से कर दिया कांड

दस करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की लैंबॉर्गिनी कार को सड़क पर फर्राटा दौड़ाए जाने के कारण चार व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद कुछ बाउंसर घटनास्थल पर एकत्र भीड़ को ताकत के दम पर पीछे कर क्षतिग्रस्त कार में फंसे चालक को लेकर मौके से फरार हो गए थे। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया था। बेटे शिवम मिश्रा को बचाने के लिए कारोबारी परिवार ने हर संभव कोशिश की, मगर इसमें वह नाकाम हो गए। शिवम को बचाने की खातिर पुलिस व अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया।

कोर्ट में एक व्यक्ति ने आवेदन देकर खुद को लैंबॉर्गिनी का चालक बताकर घटना के समय ड्राइविंग करने का दावा किया। हालांकि पुलिस की प्रारंभिक जांच में सच्चाई सामने आने के कारण फेक ड्राइवर की दाल नहीं गल पाई। दरअसल कारोबारी परिवार की योजना दूसरे व्यक्ति को आरोपी बनाकर शिवम को सीन से बाहर निकालने की थी। कानपुर में यह मामला इन दिनों सुर्खियों में है। देश में रश ड्राइविंग के केस आए दिन सामने आते हैं। सख्त नियम-कानून होने के बावजूद वाहन चालक लापरवाही बरतने से बाज नहीं आते हैं।

खासकर लग्जरी लाइफ स्टाइल जीने के आदी रईसजादे आमतौर पर सड़क पर ड्राइविंग करते समय संभावित दुर्घटना के खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार नशे की हालत में वाहन चलाने की वजह से जानलेवा हादसे हो जाते हैं। मुंबई का वह हिट एंड रन केस लंबे समय तक चर्चाओं में रहा था, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान फंस गए थे।

सलमान भी खा चुके हैं जेल की हवा

करियर की शुरुआत में सलमान ने आधी रात में नशे में ड्राइविंग कर फुटपाथ किनारे सोए कुछ नागरिकों को कुचल दिया था। बाद में अभिनेता को भी जेल की हवा खानी पड़ी थी।

इस मामले में भी सलमान को बचाने के लिए फेक ड्राइवर के सिर पर दोष मढ़ने की साजिश सामने आई थी। दिल्ली, मुंबई, बैंग्लूरु, नोएडा, गाजियाबाद, पंजाब आदि में ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं, जब किसी न किसी रईसजादे ने सड़क पर बेलगाम गति से महंगी कार दौड़ा कर दूसरों के जीवन को मुश्किल में डाला है। प्रत्येक हादसे के बाद समाज अक्सर आरोपी की परवरिश पर सवाल उठाने से नहीं चुकता है।

फांसी के फंदे पर झूली अधेड़ महिला: मौत

माता-पिता को भी आलोचना का सामना करना पड़ता है। वैसे इसमें दो राय नहीं कि बच्चे जब बड़े होकर अपने फैसले खुद लेने लगते हैं तब वह माता-पिता की भी नहीं सुनते हैं। अपवादों को छोड़ दें तो कोई भी गरीब, मध्यमवर्गीय या धनाढ्य वर्ग का मुखिया कभी नहीं चाहेगा कि उसकी औलाद समाज में ऐसा कोई काम करे, जिससे पूरे परिवार को मुसीबत झेलनी पड़े। कानपुर हादसे से उन परिवारों को सबक लेने की जरूरत है, जो अपने लाडले बच्चों को लग्जरी गाड़ी की चाबी देते समय इतराते हैं।

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