धनतेरस-दिवाली पर फिजिकल सोने की झंझट खत्म, जानें क्या है SEBI रेगुलेटेड ‘गोल्ड वॉल्ट’ और इसका नफा-नुकसान

What is Gold Vault: धनत्रयोदशी और दिवाली जैसे पावन मौकों पर सोने में निवेश की परंपरा अब आधुनिक और डिजिटल रूप ले चुकी है। पारंपरिक रूप से ज्वैलरी या सिक्कों की खरीदारी करते समय भारी मेकिंग चार्ज, शुद्धता में मिलावट का डर और घर में लॉकर की सुरक्षा को लेकर निवेशकों के मन में अक्सर संशय रहता है।
इन चिंताओं को दूर करने के लिए मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) की रियल-टाइम कीमतों पर आधारित ‘गोल्ड वॉल्ट’ (Gold Vault) निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह मॉडल पारंपरिक डिजिटल गोल्ड से अलग है क्योंकि यह खरीदार को फिजिकल सोने का मालिकाना हक देने के साथ-साथ सुरक्षित और पारदर्शी कस्टडी की सुविधा भी प्रदान करता है।
ऐसे काम करता है गोल्ड वॉल्ट
गोल्ड वॉल्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका विनियामक ढांचा है। निजी कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले अनरेगुलेटेड डिजिटल गोल्ड के उलट, गोल्ड वॉल्ट पूरी तरह से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों और निगरानी में काम करता है। इस सुविधा के तहत निवेशक जब सोना खरीदते हैं, तो उनके नाम पर एक ‘कमोडिटी रिसीट्स होल्डिंग अकाउंट’ खुलता है, जो बिल्कुल शेयर बाजार के डीमैट खाते की तरह काम करता है। ऐप के जरिए लगाए गए ऑर्डर सीधे MCX पर एक्जीक्यूट होते हैं और खरीदा गया सोना संस्थागत बीमा कवर (Institutional Insurance) वाले अधिकृत वॉल्ट में सुरक्षित रख दिया जाता है।
शुद्धता के मामले में भी यह सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी है। एक्सचेंज कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत 1 ग्राम, 8 ग्राम और 10 ग्राम की खरीद पर 999 शुद्धता (24 कैरेट) का सर्टिफाइड गोल्ड आवंटित होता है, जबकि 100 ग्राम और 1 किलोग्राम के बड़े लॉट्स के लिए 995 शुद्धता का मानक लागू रहता है। स्थानीय सर्राफा बाजार में दिखने वाले मनमाने प्रीमियम या हिडन मार्जिन के मुकाबले यहां रियल-टाइम एक्सचेंज रेट मिलता है। इसके अलावा, निवेशक जब चाहें अपने डिजिटल होल्डिंग के बदले फिजिकल गोल्ड बार या सिक्के की होम डिलीवरी भी ले सकते हैं।
धनतेरस पर सोना खरीदना फायदे का सौदा या नुकसान, जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट
हालांकि, गोल्ड वॉल्ट में निवेश करने से पहले निवेशकों को इसके वित्तीय गणित और नियमों को समझना जरूरी है। यूपीआई ऐप्स पर मिलने वाले 100 या 500 रुपये के डिजिटल गोल्ड की तरह इसमें माइक्रो-इन्वेस्टमेंट नहीं किया जा सकता; यहां न्यूनतम खरीद 1 ग्राम से शुरू होती है। साथ ही सोने के बेस प्राइस के अलावा 3% जीएसटी, ब्रोकरेज, 0.1% फिजिकल सेटलमेंट चार्ज (जिस पर 18% जीएसटी अलग से), एनुअल स्टोरेज फीस और डिलीवरी मंगाने पर शिपिंग चार्ज चुकाना पड़ता है। इसके अलावा, सौदे के संभावित खर्चों को सुरक्षित रखने के लिए कुल रकम का 5% हिस्सा एडवांस मार्जिन के तौर पर ब्लॉक किया जाता है। ऐसे में जो निवेशक बिना किसी मिलावट और चोरी के डर के कम से कम 1 ग्राम शुद्ध सोना जमा करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक रेगुलेटेड और सुरक्षित विकल्प साबित हो रहा है।



