War Predictions 2026: ज्योतिषियों ने युद्ध खत्म होने की तारीख बताई

War Predictions 2026: आज दुनिया एक बहुत ही नाज़ुक मोड़ पर खड़ी है। अलग-अलग इलाकों में युद्ध भड़कते देखना, बिना किसी उकसावे के झगड़े बढ़ते देखना, और देशों को इस लड़ाई में घसीटा जाते देखना- आम लोगों के मन में डर पैदा होना स्वाभाविक है। हालाँकि, RJ अधिश के साथ एक इंटरव्यू में, ज्योतिषी यशदा क्षीरसागर ने मौजूदा युद्ध की स्थिति के बारे में कुछ खास बातें बताईं। उन्होंने कहा कि इन सभी विनाशकारी घटनाओं के लिए ग्रहों की एक खास चाल ज़िम्मेदार है—और अच्छी बात यह है कि वह दिन अब करीब आ रहा है जब इन दो ग्रहों का यह ‘मेल’ आखिरकार टूट जाएगा! क्या नए साल की शुरुआत के लिए यह सचमुच एक बहुत ही बढ़िया खबर नहीं है? पूरी जानकारी के लिए आगे पढ़ें…
1. अंगारक योग: दो ज़िद्दी ग्रहों का मेल
ज्योतिष में, मंगल को ‘आग’ और ‘ऊर्जा’ का प्रतीक माना जाता है, जबकि राहु को ऐसा ग्रह माना जाता है जो ‘भ्रम’ पैदा करता है और ‘अजीबोगरीब घटनाओं’ को जन्म देता है। जब ये दोनों ग्रह एक साथ आते हैं, तो ‘अंगारक योग’ बनता है।
अजीब स्वभाव: ये दोनों ग्रह बहुत ज़्यादा ज़िद्दी और रहस्यमयी होते हैं।
मानसिकता पर असर: यह मेल सीधे तौर पर इंसान की सोच पर हमला करता है; यह सोचने-समझने की शक्ति को कम करता है और साथ ही गुस्से को भी बढ़ाता है।
2. वैश्विक संघर्ष पर इस मेल के नतीजे
यशदा क्षीरसागर ने मौजूदा युद्धग्रस्त वैश्विक हालात का बहुत ही बारीकी से विश्लेषण किया है। वे कहती हैं:
बिना उकसावे के संघर्ष: अभी जो युद्ध चल रहे हैं, वे बिना किसी ठोस वजह के लड़े जा रहे हैं।
बढ़ते झगड़े: यहाँ तक कि जिन मुद्दों को बातचीत और मोलभाव से आसानी से सुलझाया जा सकता था, वे भी सिर्फ़ ज़िद की वजह से पूरी तरह से युद्ध में बदल गए हैं। विस्तार: जो संघर्ष पहले सिर्फ़ एक देश तक सीमित था, वह अब दूसरे देशों के शामिल होने की वजह से वैश्विक रूप ले रहा है। ये सभी संकेत मंगल-राहु की युति के नकारात्मक प्रभाव का ही प्रतिबिंब हैं।
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3. आशा की एक किरण
इस सारी नकारात्मकता के बीच, यशदा क्षीरसागर ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दिलासा देने वाली बात कही है—वह है, ‘बदलाव’।
- “2 अप्रैल के बाद, यह स्थिति बदल जाएगी।”
- ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस ग्रह युति का प्रभाव 2 अप्रैल के बाद कम होना शुरू हो जाएगा। इसका अर्थ निम्नलिखित है:
- वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्ष कम होने लगेंगे।
- बातचीत और सुलह के माध्यम से युद्ध का समाधान निकलने की संभावना बनेगी।
- लोगों के मन पर छाया हुआ डर और आक्रामकता कम होगी, जिससे शांतिपूर्ण माहौल बनने का मार्ग प्रशस्त होगा।



