सपा में होगी बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, इन नेताओं को पार्टी से निष्कासित करेंगे अखिलेश यादव
सपा संगठन में होने वाली सर्जरी की तैयारी, अखिलेश यादव सक्रिय मोड में

बिहार में वोट अधिकार यात्रा पूरी करने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अब अपनी पार्टी के आंतरिक ढांचे को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। पार्टी सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, वे जल्द ही संगठन के कई प्रकोष्ठों में फेरबदल कर सकते हैं।
अंदरखाने से जो बातें सामने आई हैं, उसके मुताबिक अखिलेश यादव पार्टी के उन चेहरों को किनारे लगाने के मूड में हैं, जो केवल पद पर बने हुए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे। वही दूसरी ओर, जिन कार्यकर्ताओं ने निरंतर मेहनत की है और संगठन के लिए समर्पण दिखाया है, उन्हें नई ज़िम्मेदारियां देकर आगे बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है।
इन नेताओं की छुट्टी तय
पार्टी से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि हाल ही में सपा अध्यक्ष को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई है जिसमें यह बताया गया है कि संगठन के कई जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग केवल नाम के लिए मौजूद हैं। यह रिपोर्ट खुद पार्टी के आंतरिक नेटवर्क से जुटाई गई है और अखिलेश ने इस पर गंभीरता से विचार किया है।
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सूत्रों का दावा है कि अखिलेश यादव ऐसे नेताओं को जल्द ही बाहर रास्ता दिखाएंगे जो पार्टी में हैं, पर वो सक्रिय नहीं हैं।
इन नेताओं को मिलेगा सम्मान
एक तरफ जहां निष्क्रिय लोगों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी है, वहीं पार्टी नेतृत्व की तरफ से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जो भी कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर लगातार काम कर रहे हैं, उन्हें न सिर्फ सम्मान मिलेगा बल्कि संगठन के अंदर उन्हें प्रमुख जिम्मेदारियां भी सौंपी जाएंगी।
इस संबंध में सपा प्रवक्ता दीपक रंजन का कहना है कि समय-समय पर संगठन में बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया है और इसका मकसद पार्टी को ज़्यादा मज़बूत बनाना है।
2027 की रणनीति और बीजेपी से सीधी टक्कर
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी की नजर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है और इसकी सीधी लड़ाई बीजेपी से मानी जा रही है। यह बात किसी से छिपी नहीं कि बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा उत्तर प्रदेश में बेहद मज़बूत है। ऐसे में अगर सपा को मुकाबले में बने रहना है, तो उसे अपने संगठन को उसी ताकत और चुस्ती से लैस करना होगा।
सपा नेतृत्व इस बात को समझ रहा है, इसलिए संगठनात्मक मजबूती को सबसे ऊपर रखा गया है। खासकर पीडीए जैसे गठजोड़ों के साथ-साथ पार्टी का फोकस अब आंतरिक ढांचे पर भी है।



