18 रुपए तक महंगे हो सकते हैं घरेलू सिलेंडर, सरकार लगा सकती है टैक्स; वजह जानें

strategic energy reserves India: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ संभावित संघर्ष के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा खाका तैयार किया है। रॉयटर्स की एक गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार देश के रणनीतिक ऊर्जा भंडार (Strategic Energy Reserves) को काफी हद तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
हालांकि, इस मेगा प्रोजेक्ट का वित्तीय बोझ सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि इस फंड को जुटाने के लिए एलपीजी (LPG) और पीएनजी (PNG) पर नया लेवी या टैक्स लगाए जाने का प्रस्ताव है।
उपभोक्ताओं पर टैक्स का बोझ और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी
इस प्रस्तावित योजना के तहत एलपीजी पर 1.29 रुपये प्रति किलोग्राम की विशेष लेवी लगाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे 14.2 किलोग्राम वाले सामान्य घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में लगभग 18 रुपये की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के इस्तेमाल पर 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की लेवी का प्रस्ताव है, जिससे घरों के मासिक गैस बिल में करीब 2 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। आमतौर पर सरकारें ऐसे सामरिक भंडारों का खर्च अपने राजकोष से उठाती हैं, लेकिन यदि यह सिफारिश लागू होती है तो लागत का एक हिस्सा पहली बार सीधे उपभोक्ताओं को वहन करना होगा।
$42 बिलियन की इस योजना का मुख्य लक्ष्य क्या है?
ईरान संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार ने आपातकालीन तैयारी तेज कर दी है। इस योजना के तहत कम से कम दो महीने के लिए कच्चे तेल और एलएनजी (LNG), तथा छह सप्ताह के लिए एलपीजी का सुरक्षित घरेलू भंडार तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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इन विशाल रणनीतिक भंडारों को विकसित करने में लगभग 42 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये) की लागत आने का अनुमान है। सरकार इस नए लेवी के माध्यम से सालाना लगभग 1.5 बिलियन डॉलर यानी 12,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है ताकि देश के ऊर्जा भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।



