महाराष्ट्र में ‘भाईजान की पतंग’ पर बवाल, क्या इस वजह से लग जाएगा बैन
Maharashtra Municipal Election 2026: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। दो दर्जन से अधिक महानगर पालिकाओं में पंद्रह जनवरी को वोटिंग कराई जाएगी। इसके अगले दिन मतगणना कराकर नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव में एक माह से कम का समय शेष है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दलों ने युद्धस्तर पर तैयारियां आरंभ कर दी हैं।
निकाय चुनाव की बढ़ती सरगर्मी के बीच महाराष्ट्र की सियासत में ‘भाईजान की पतंग’ चर्चाओं में है। ‘पतंग’ अभी उड़ी भी नहीं है कि उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। यह अनूठा एवं हास्यास्पद विवाद चर्चा के केंद्र में है। दरअसल असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी निकाय चुनाव की तैयारी में शिद्दत से जुट गई है। पार्टी ने 27 नगर निकायों में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
एआईएमआईएम के चुनाव चिन्ह पर क्यों लगना चाहिए बैन
एआईएमआईएम का चुनाव चिन्ह ‘पतंग’ है। संयोग की बात है कि महाराष्ट्र में निकाय चुनाव उसी दिन हैं, जब मकर संक्रांति पर्व पड़ रहा है। मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की पुरानी परंपरा है। इसके मद्देनजर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने एआईएमआईएम के चुनाव चिन्ह पर बैन लगाने की मांग की है। शिवसेना (शिंदे) के नेता संजय शिरसाट ने इस सिलसिले में राज्य निर्वाचन आयोग से मुलाकात करने का इरादा जाहिर कर दिया है।
संजय शिरसाट फडणवीस सरकार में मंत्री हैं। शिरसाट की मांग को एआईएमआईएम ने हास्यास्पद करार दिया है। असदुद्दीन ओवैसी के करीबी एवं पूर्व सांसद इम्तियाज अली ने इस मुद्दे पर शिवसेना (शिंदे) को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने तंज कसा कि भाजपा-शिवसेना नेताओं को अगले एक माह तक हाथ घड़ी नहीं पहननी चाहिए। चूंकि एनसीपी का चुनाव चिन्ह ‘घड़ी’ है। वैसे भी एनसीपी विपक्ष का हिस्सा है।
यूपी के उस दौर की यादें हुई ताजा
बहरहाल महाराष्ट्र की सियासत में ‘पतंग’ पर उभरा विवाद तेज होता दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र के इस सियासी विवाद ने यूपी के उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब चुनावी मौसम में जगह-जगह हाथी की प्रतिमाओं को ढकवा दिया गया था। ‘हाथी’ बसपा का चुनाव चिन्ह है। गौतमबुद्ध नगर और लखनऊ में हाथी की प्रतिमाओं को ढके जाने पर खूब बवाल मचा था। महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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खासकर मुंबई महानगरपालिका पर वर्चस्व के लिए सभी दलों में होड़ रहती है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की पालिका का सालाना बजट भी भारी-भरकम होता है। निकाय चुनाव में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को भाजपा, शिवसेना (शिंदे), एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना (ठाकरे) व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) जैसे दल अभी से उतावले दिखाई दे रहे हैं। इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों के अलावा लोकल और बाहरी नागरिकों का मुद्दा भी उठने के प्रबल आसार हैं। चुनाव में फडणवीस सरकार के कामकाज का टेस्ट भी होगा।
टूट से पहले शिवसेना का महानगरपालिकाओं में वर्चस्व कायम रहता था। वर्तमान में स्थिति अलग है। निकास चुनाव में भाजपा और शिवसेना (शिंदे) की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
चूंकि राज्य की सत्ता पर यह दो प्रमुख दल काबिज हैं। उधर, एआईएमआईएम के चुनाव चिन्ह को लेकर जारी विवाद कितना गहराएगा यह देखना दिलचस्प होगा। शिवसेना (शिंदे) ने जो तर्क देकर एआईएमआईएम के चुनाव चिन्ह पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है, उस पर चुनाव आयोग कोई कार्रवाई करेगा, ऐसा संभव नहीं लगता।



