वीरों सपूतों का त्याग हमें याद रखना राष्ट्र का कर्तव्य: मुनि भाव सागर
देश की आजादी पर मन के विकारों की मुक्ति भी जरूरी

जसवंतनगर,इटावा। चातुर्मास के दौरान स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों में देश की आजादी और आध्यात्मिक स्वतंत्रता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि आज हम स्वतंत्र भारत में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो इसके पीछे स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग और बलिदान है। हमें उनके आदर्शों को जीवन में उतारकर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
मुनि श्री ने कहा कि भगत सिंह, राजगुरु,चंद्रशेखर आजाद सहित अनेक वीर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपने परिवार और सुख-सुविधाओं तक का त्याग कर दिया। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश को स्वच्छ और संस्कारित वातावरण की आवश्यकता है। संत और सैनिक राष्ट्र की सच्ची सेवा कर रहे हैं। सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करते हैं,जबकि संत समाज को सदाचार, संयम और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं।
मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं है। मनुष्य को मोह,आसक्ति और विकारों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए। भगवानों ने मोह रूपी शत्रु पर विजय प्राप्त कर सच्ची स्वतंत्रता का मार्ग दिखाया है। आत्मकल्याण के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य वास्तविक स्वतंत्रता का अनुभव कर सकता है।



