99% लोग नहीं जानते ‘ध्वजारोहण’ और ‘झंडा फहराने’ का ये सीक्रेट, जानिए क्या है दोनों में असली फर्क

Flag Hoisting vs Unfurling: राष्ट्रीय पर्व आते ही पूरे देश में देशभक्ति का माहौल छा जाता है। टीवी पर होने वाले सीधे प्रसारण और भव्य आयोजनों को देखना हर भारतीय को गर्व से भर देता है। हालांकि बहुत से लोगों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के आयोजनों के बीच का सूक्ष्म अंतर नहीं पता होता। आम बोलचाल में हम दोनों ही मौकों पर ‘झंडा फहराना’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं लेकिन संवैधानिक और तकनीकी दृष्टि से इन दोनों प्रक्रियाओं (ध्वजारोहण और झंडा फहराना) में बड़ा फर्क है। आइए इस राष्ट्रीय धरोहर से जुड़े अहम नियमों को विस्तार से समझते हैं।
स्वतंत्रता दिवस: ध्वजारोहण (Flag Hoisting)
15 अगस्त के ऐतिहासिक दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले से ध्वजारोहण करते हैं। इस दिन तिरंगे को खंभे के बिल्कुल निचले हिस्से में बांधा जाता है और एक खास डोरी के जरिए इसे ऊपर की ओर खींचा जाता है। ऊपर पहुंचने के बाद झंडा हवा में लहराता है। नीचे से ऊपर जाने की यह पूरी प्रक्रिया विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़कर एक स्वतंत्र राष्ट्र के उदय को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रक्रिया को ‘फ्लैग होस्टिंग’ का नाम दिया गया है।
गणतंत्र दिवस: झंडा फहराना (Flag Unfurling)
वहीं दूसरी ओर 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर देश के महामहिम राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा पहले से ही खंभे के सबसे ऊपरी सिरे पर एक बंडल के रूप में बंधा होता है। राष्ट्रपति केवल डोरी खींचकर इस बंधे हुए झंडे को खोलते हैं। चूंकि इस समय तक भारत एक स्वतंत्र देश बन चुका था इसलिए झंडे को नीचे से ऊपर ले जाने की आवश्यकता नहीं होती। यह प्रक्रिया भारतीय संविधान के लागू होने और हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना का जश्न है जिसे ‘फ्लैग अनफर्लिंग’ कहा जाता है।
15 अगस्त पर डांस के लिए नहीं मिल रहा परफेक्ट गाना, ये 5 देशभक्ति गीत आपके परफॉर्मेंस को बना देंगे सुपरहिट
आयोजनों का नेतृत्व: प्रधानमंत्री बनाम राष्ट्रपति
इन दोनों राष्ट्रीय पर्वों पर अलग-अलग नेतृत्व का भी एक खास ऐतिहासिक कारण है।
-
15 अगस्त की स्थिति: साल 1947 में जब देश आजाद हुआ था तब भारत का अपना कोई संविधान लागू नहीं हुआ था और ना ही राष्ट्रपति का पद अस्तित्व में था। इसलिए सरकार के मुखिया के तौर पर प्रधानमंत्री यह जिम्मेदारी निभाते हैं।
-
26 जनवरी की स्थिति: यह दिन हमारे संविधान के लागू होने का प्रतीक है। चूंकि महामहिम राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक प्रमुख होते हैं इसलिए गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह उनके नेतृत्व में संपन्न होता है।



