भारत की हो गई बल्ले बल्ले; युद्ध के बीच बड़ी खुशखबरी, 5 देशों के लिए खुला होर्मुज

Iran on Strait of Hormuz: मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब केवल देशों के बीच टकराव तक सीमित नहीं रहा। इसका सीधा प्रभाव दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ऐसा रुख अपनाया है, जिसने कई देशों की धड़कनें तेज कर दी हैं। यह रास्ता अब सिर्फ जहाजों की आवाजाही का माध्यम नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव का साधन बन गया है।
क्या बदला है होर्मुज में?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्षी ने संकेत दिया है कि यह जलमार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। लेकिन जिन देशों से ईरान के संबंध तनावपूर्ण हैं, उनके लिए यहां से गुजरना मुश्किल बना दिया गया है।
इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों पर रोक लग सकती है। वहीं भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए रास्ता खुला रहने की बात कही गई है, हालांकि इसके लिए समन्वय जरूरी होगा।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
अगर स्थिति बिगड़ती है तो ईंधन महंगा हो सकता है, ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है, रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं यानी यह संकट सिर्फ देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आम आदमी की जेब पर भी असर डालेगा।
ईरान के इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और शिपिंग कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं।
ऊर्जा संकट की आशंका के चलते कई देशों ने वैकल्पिक योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। इससे साफ है कि स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन चुकी है।
भारत ने क्या कदम उठाया?
भारत ने भी इस चुनौती को गंभीरता से लिया है। भारतीय नौसेना ने “ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा” शुरू किया है। इस अभियान के तहत कई युद्धपोत तैनात किए गए हैं, तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों की सुरक्षा बढ़ाई गई है, जरूरी सप्लाई को सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है। ये कदम दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
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पांच देशों को राहत क्यों?
जहां कई देशों के लिए चिंता बढ़ी है, वहीं कुछ देशों को राहत भी मिली है। भारत सहित पांच देशों के लिए यह मार्ग खुला रहने की बात सामने आई है। इससे इन देशों को फिलहाल ऊर्जा आपूर्ति में बड़ी बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।



