ईरान का 16 लाख का ड्रोन, इज़राइल-अमेरिका की 25 करोड़ की मिसाइल से बेहतर

Iran israel war live 2026: जंग के मैदान में अब सिर्फ़ ताकत ही मायने नहीं रखती, बल्कि अब ‘फ़ायदेमंद’ कौन है, इसकी लड़ाई भी शुरू हो गई है। ईरान-इज़राइल की लड़ाई हो या रूस-यूक्रेन की जंग, एक नई इकॉनमिक सच्चाई ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है। दुश्मन की करोड़ों की मिसाइलों को रोकने के लिए अपने खजाने से अरबों रुपये खर्च करना अब किसी भी डेवलप्ड देश की इकॉनमी के लिए अफ़ोर्डेबल नहीं रहा। इसे ही मिलिट्री की भाषा में ‘कॉस्ट एसिमेट्री’ कहा जा रहा है।
15 हज़ार गुना महंगा वार!
जंग के मैदान की कड़वी सच्चाई सामने आ गई है। ईरान के ‘शाहेद-136’ ड्रोन की कीमत सिर्फ़ 16 लाख रुपये है, लेकिन इसे हवा में ही खत्म करने के लिए अमेरिका या इज़रायल को अपनी ‘पैट्रियट’ मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है। एक ‘पैट्रियट’ मिसाइल दागने की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये है। इसका मतलब है कि बचाव करने वाले देश को सिर्फ़ एक ड्रोन को रोकने के लिए हमलावर से 15,000 गुना ज़्यादा खर्च करना पड़ता है। किसी भी देश के बजट के लिए इस फाइनेंशियल घाटे को लंबे समय तक झेल पाना नामुमकिन है।
‘आसमान में AK-47’: शाहेद ड्रोन का आतंक
ईरान के शाहेद ड्रोन को अब ‘आसमान में AK-47’ माना जा रहा है। इनका मकसद सिर्फ हमला करना नहीं, बल्कि दुश्मन को आर्थिक रूप से लूटना है। 21 करोड़ रुपये की टॉमहॉक मिसाइल को मार गिराकर 30 लाख के ड्रोन को मार गिराना दुश्मन की जीत है। हमला करने वाली पार्टी जानबूझकर सस्ते ड्रोन की लहर भेजती है ताकि दूसरे देश के महंगे इंटरसेप्टर खत्म हो जाएं और उनके खजाने खाली हो जाएं।
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ज़मीन पर तस्वीर: टैंक बनाम FPV ड्रोन
ज़मीनी लड़ाई में भी यही ट्रेंड देखा जा रहा है। 33 से 42 हज़ार रुपये का एक छोटा ‘FPV’ ड्रोन, जो रिमोट से चलता है, सीधे रूसी ‘T-90M’ या 37 से 66 करोड़ रुपये के अमेरिकी ‘अब्राम्स’ टैंक को कुछ ही पलों में राख कर रहा है। बड़े और महंगे टैंक अब सस्ते शिकार करने वाले ड्रोन के सामने बेबस हो रहे हैं।



