सराहनीय कार्य करने वाले महापुरुष सदैव स्मरणीय रहेगें: अजय यादव

लोकमाता की जन्म जयंती पर काटा केक, श्रद्धासुमन किए अर्पित

भरथना,इटावा। समाजहित में जिनके द्वारा सराहनीय कार्य किये गये,वह सदैव स्मरणीय रहेगें। इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी गई उनकी एक-एक कार्यशैली हमें भी उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैं।

उक्त बात रविवार की सांय कस्बा के मुहल्ला मन्दिर दानसहाय स्थित विश्वनाथ मैरिज होम में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयन्ती के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष अजय कुमार यादव गुल्लू ने कही। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर सेवा समिति भरथना के तत्वाधान् में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने समाज के अन्य गणमान्यजनों रामप्रकाश पाल,वीरेन्द्र सिंह चौहान, राजेन्द्र चौधरी,अनिल कुमार श्रीवास्तव,आरएन दुबे,विष्णु भदौरिया,पूर्व सभासद रामशंकर वर्मा, श्रीभगवान पोरवाल आदि के साथ लोकमाता अहिल्याबाई के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। तदुपरान्त कार्यक्रम में शिरकत करने पहुँचे क्षेत्रीय विधायक राघवेन्द्र गौतम के साथ केक काटकर उनकी जयन्ती की एक-दूसरे को शुभकामनायें देते हुए उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को याद किया गया।

इस मौके पर सभासद प्रतिनिधि प्रेमचन्द्र गौतम,अनुज पाल,विनोद वर्मा,भूरे पाल,फूल सिंह पाल,प्रताप वर्मा,अंकित पाल,बलखण्डी सेंगर सहित कई सभ्रान्तजनों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता रिटायर्ड सहायक भूलेख अधिकारी रामप्रकाश पाल ने की।

भरथना के मन्दिर दानसहाय शुक्लागंज के विश्वनाथ मैरिज होम में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर सेवा समिति द्वारा लोकमाता की 301वीं जन्म जयंती बड़े ही हर्षौल्लास के साथ मनाई गई।

बीती रविवार की शाम आयोजित उक्त कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने लोकमाता अहिल्याबाई की जन्म जयंती पर जहाँ एक ओर अतिथियों के साथ अन्य समाजसेवियों ने लोकमाता अहिल्याबाई अमर रहें की जगह जिंदाबाद के जमकर नारे लगाये गए। वहीं कुछ अतिथियों ने लोकमाता को श्रद्धा सुमन अर्पित के दौरान अपने जूते सैंडल चप्पलें उतरना तक उचित नहीं समझा।

जिसको लेकर कार्यक्रम में मौजूद युवा समाजसेवी अंकित पाल ने मौजूद लोगों के सामने मंच से अपना विरोध व्यक्त किया।

अंकित पाल ने साफ तौर पर कहा कि हमारे देश के जो भी महापुरुष हैं और अपने अपने कुल देवी देवताओं समेत पूजा अर्चना करते हैं तब कोई भी जूते चप्पल उतार कर ही करते हैं लेकिन आज लोकमाता के सम्मान ने आयोजित उनकी जन्म जयंती समारोह में ज्यादा तर लोगों ने बगैर जूता उतारे ही उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये हैं,यह होल्कर जी का सम्मान कितना उचित है। सुनकर अन्य लोग आश्चर्य में पड़ गये।

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