‘जितना तेल चाहिए उतना देंगे’: अमेरिकी पाबंदियों की धमकियों के बीच रूस का भारत को बड़ा ऑफर

Denis Alipov Russian Ambassador: अमेरिकी पाबंदियों और भारी-भरकम टैरिफ की बढ़ती धमकियों के बीच रूस ने भारत के साथ अपनी रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत करने का खुला ऐलान किया है।

भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने स्पष्ट किया है कि मॉस्को भारत की हर ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए तैयार है और भारत को जितनी मात्रा में कच्चे तेल की आवश्यकता होगी, उतनी आपूर्ति निर्बाध रूप से की जाएगी। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान रूसी राजदूत ने पश्चिमी देशों द्वारा रूसी कच्चे तेल की बिक्री पर नए प्रतिबंध थोपने की कोशिशों को सरासर दबाव बनाने का अनुचित हथकंडा करार दिया।

पश्चिमी पाबंदियों पर तीखा प्रहार: ‘वे हमसे बेहतर डील कभी नहीं दे सकते’

रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने पश्चिमी देशों की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद साथी बना रहेगा। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह है कि जो देश आज पाबंदियां और टैरिफ लगाने की वकालत कर रहे हैं, उन्होंने निष्पक्ष सहयोग के बजाय केवल दबाव और धमकी का रास्ता चुना है। अलीपोव ने दो टूक कहा कि यही मुख्य कारण है कि वे पश्चिमी देश कभी भी भारत को कच्चे तेल पर रूस से अधिक किफायती, सुरक्षित और बेहतर डील की पेशकश नहीं कर सकते।

भारत का नंबर-1 तेल सप्लायर बना रूस, कुल आयात में 50% से अधिक हिस्सेदारी

रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए कच्चा तेल आयात करने का सबसे बड़ा स्रोत रूस ही बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात में रूस की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 50.83 प्रतिशत यानी लगभग 2.47 मिलियन बैरल प्रति दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गई।

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पिछले साल की समान अवधि की तुलना में भारत द्वारा रूसी तेल के आयात में 62.4 फीसदी का भारी उछाल दर्ज किया गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि पश्चिमी पाबंदियों की परवाह किए बिना भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

अमेरिकी सीनेट का नया बिल और 100% टैरिफ का खतरा

दूसरी तरफ, अमेरिका में रूसी तेल की खरीद को रोकने के लिए नया विधायी दांव चला गया है। अमेरिकी सीनेट ने एक विवादास्पद बिल तैयार किया है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का विशेषाधिकार मिल जाएगा। इन प्रतिबंधों के निशाने पर विशेष रूप से वे देश हैं जिन पर ऊर्जा पाबंदियों को बेअसर करने का आरोप मढ़ा जा रहा है। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के सबसे बड़े वैश्विक खरीदार बनकर उभरे हैं।

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