श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ऐसे रखें व्रत: ज्योतिषाचार्य से जानिए संकल्प मंत्र, पूजा विधि और खानपान के जरूरी नियम

Janmashtami fast rules 2026: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान और शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करते हुए व्रत रखने और लड्डू गोपाल की आराधना करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। यदि आप पहली बार जन्माष्टमी का व्रत करने जा रहे हैं या हर साल यह उपवास रखते हैं, तो ज्योतिषाचार्य पं. राकेश झा से समझिए इस व्रत को करने की शास्त्रीय विधि और खानपान से जुड़े सख्त नियम।
सप्तमी तिथि से ही शुरू हो जाते हैं संयम के नियम
पं. राकेश झा के अनुसार, जिस तरह एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से लागू होते हैं, उसी तरह जन्माष्टमी व्रत की तैयारी भाद्रपद कृष्ण सप्तमी से ही आरंभ हो जाती है। सप्तमी के दिन से ही तामसिक भोजन, मदिरा और लहसुन-प्याज का पूरी तरह त्याग कर देना चाहिए। इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। इसके अतिरिक्त, परंपरा के अनुसार सप्तमी तिथि को घर में बैंगन और मूली जैसी सब्जियां बनाने और खाने से परहेज करना चाहिए।
संकल्प से लेकर मध्य रात्रि जन्मोत्सव तक की संपूर्ण विधि
अष्टमी के दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद हाथ में गंगाजल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लेना आवश्यक है।
संकल्प के समय यह मंत्र बोलें: ‘ममाखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये’
दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण और मंत्रों का जाप करते रहें। सामान्य व्रती दिन में फलाहार और जल ले सकते हैं, लेकिन जो श्रद्धालु निर्जला उपवास रखते हैं वे अन्न-जल दोनों का त्याग करते हैं। फलाहार व्रत रखने वालों को भी सूर्यास्त के बाद से लेकर कान्हा के जन्म तक निर्जल रहने का प्रयास करना चाहिए। शाम के समय एक बार पुनः स्नान कर पूजा की तैयारी करें। मध्य रात्रि में ठीक 12 बजे बाल गोपाल के प्राकट्य, विशेष पूजन, आरती और चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
जन्माष्टमी व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं
व्रत के दौरान खानपान की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है ताकि साधना खंडित न हो।
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क्या खाएं: व्रत में केला, सेब, अनार जैसे ताजे मौसमी फल खाए जा सकते हैं। इसके अलावा दही, साबूदाना और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी फलाहारी चीजें ली जा सकती हैं। मीठे के लिए रिफाइंड चीनी के बजाय गुड़ या शहद का प्रयोग करें और भोजन शुद्ध देसी घी में ही बनाएं। साधारण नमक के स्थान पर केवल सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है।
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किन चीजों से करें परहेज: जन्माष्टमी के दिन अन्न, दालें और साधारण नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित है। खाना पकाने में रिफाइंड तेल का इस्तेमाल न करें। सब्जियों में मूली, गाजर, लौकी और चुकंदर खाने से बचें। जो लोग व्रत नहीं भी रख रहे हैं, उन्हें भी इस पावन दिन पर तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज और मांसाहार से दूर रहना चाहिए।



