योगी की अर्थी निकालो, सुल्तानपुर सीएमएस की बेतुकी बयानबाजी के बाद सस्पेंड

चेतावनी…मांगें पूरी न होने पर विरोध में सीएमएस और सीएमओ की अर्थी निकाली जाएगी। जवाब…मेरी और सीएमओ की अर्थी क्यों निकालोगे, सरकार और योगी की निकालो। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता वंशराज दुबे और कार्यवाहक सीएमएस डॉ. भास्कर के बीच का यह संवाद बड़े विवाद का कारण बन गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को एक्शन लेना पड़ा है। आपत्तिजनक एवं बेतुकी बयानबाजी के लिए डॉ. भास्कर को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है।

मामला सुल्तानपुर के बिरसिंहपुर सरकारी अस्पताल से जुड़ा है। अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं न मिलने पर आप कार्यकर्ताओं को धरना-प्रदर्शन करना पड़ा था। ऐसे में प्रदर्शनकारियों के तीखे सवालों से झुंझलाए डॉ. भास्कर ने ऐसा जवाब दे दिया, जिसकी उम्मीद नहीं की गई थी। भाजपा विधायक राज प्रसाद उपाध्याय ने इस घटना का वीडियो वायरल कर दिया था।

सरकारी डॉक्टर को लेने के देने पड़ गए

नतीजन संयम व धैर्य से काम न लेने पर सरकारी डॉक्टर को लेने के देने पड़ गए हैं। हालांकि डॉ. भास्कर ने खुद को बेकसूर बताकर स्थानीय विधायक की ईमानदारी पर सवाल उठा दिए हैं। इसके बावजूद यह मामला आसानी से शांत होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सूबे में सरकारी अस्पतालों की बदहाली जगजाहिर है। वहां फैली अव्यवस्थाओं से मरीजों को प्रतिदिन दो-चार होना पड़ता है। चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक सीधे मुंह बात नहीं करते।

मरीजों को जांच कराने और दवा लेने के लिए कई-कई घंटे तक लाइन में लगना पड़ता है। डॉक्टरों द्वारा बाहर से दवाएं लिखने की शिकायतें आम हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी की जाती है। यदि किसी डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ के खराब व्यवहार की शिकायत की जाए तो कोई कार्रवाई नहीं होती। सरकारी अस्पताल में खराब माहौल के लिए सरकार भी कम जिम्मेदार नहीं है। समय के साथ आबादी काफी बढ़ चुकी है, मगर अस्पतालों की संख्या में वैसी वृद्धि नहीं हो सकी है। पुराने अस्पतालों पर मरीजों का दबाव निरंतर बढ़ रहा है।

जिस तरह का रवैया दिखाया, वह कतई उचित नहीं

मरीजों की संख्या के हिसाब से डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की संख्या नहीं बढ़ पाई है। बड़े अस्पतालों में सरकारी डॉक्टरों को पांच से छह घंटे के भीतर सैकड़ों मरीजों की जांच करनी होती है। इसके अलावा ऑपरेशन की ड्यूटी व वार्डों में भर्ती मरीजों का हालचाल भी पूछना होता है। नतीजन डॉक्टर व अन्य स्टाफ दिनभर तनाव के मध्य अपने काम को अंजाम देता है। संसाधन एवं सुविधाओं के लिए शासन स्तर पर कई-कई बार पत्र व्यवहार करना पड़ता है। हालांकि सुल्तानपुर में डॉ. भास्कर ने जिस तरह का रवैया दिखाया, वह कतई उचित नहीं कहा जाएगा।

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सरकारी सेवा में होने के कारण वह जनता के प्रति जवाबदेह हैं। अस्पताल के प्रभारी के तौर पर उनका दायित्व और बढ़ जाता है। वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं। सरकारी अस्पताल में सुविधाओं की बजाए अव्यवस्थाएं होने पर विरोध दर्ज कराना भी जायज है।

आप कार्यकर्ता वहां निजी स्वार्थवश दो दिन से धरना-प्रदर्शन करने नहीं बैठे थे। कम से कम भाजपा विधायक के इशारे पर तो विपक्ष के कार्यकर्ता ऐसा नहीं करेंगे। सस्पेंड होने के बाद डॉ. भास्कर यह कहकर नहीं बच सकते कि मैं पिछले कुछ समय से तनाव में चल रहा हूं। जिस प्रकार की बातें उन्होंने कही हैं, वह उन्हें कतई शोभा नहीं देती हैं।

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