यूपी में गठबंधन पर घिरी कांग्रेस, सपा के साथ सीट शेयरिंग पर फंसा पेंच या खत्म होगा वजूद

Congress SP Alliance UP: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक चार महीने पहले विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम कर रही कांग्रेस पार्टी के भीतर ही गठबंधन को लेकर दो फाड़ नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी के साथ सीट तालमेल को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। हालिया सांगठनिक बदलाव के बाद प्रदेश नेतृत्व की अलग-अलग राय ने इंडिया गठबंधन की राह को और पेचीदा बना दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस एक बार फिर अपने पुराने ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को रीवाइव करने की जुगत में है। पार्टी की नई कमान और नेताओं की बयानबाजी से साफ है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी खोई हुई जमीन तलाशना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। दिसंबर 1989 में सत्ता से बाहर होने के बाद से पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में लगातार सेंध लगी है। मंडल और कमंडल की राजनीति के दौर में सवर्ण वोटर बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो गए, दलित मतदाता बसपा के साथ चले गए और मुस्लिम वोट बैंक समाजवादी पार्टी के पाले में लामबंद हो गया।
ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो 1985 में 269 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 1989 में घटकर 94 सीटों पर आ गई थी। साल 1991 के चुनाव में 46 सीटें, 1993 में 28 सीटें और 1996 में बसपा के साथ गठबंधन के बावजूद पार्टी सिर्फ 33 सीटों पर सिमट गई थी। सोनिया गांधी के नेतृत्व में भी हालात नहीं बदले और 2002 में 25, 2007 में 22 तथा 2012 के चुनाव में पार्टी 28 सीटों पर ही टिक पाई।
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साल 2017 में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी का प्रयोग भी फ्लॉप साबित हुआ था, जहां 6.25 फीसदी वोट शेयर के साथ पार्टी सिर्फ 7 सीटों पर सिमट गई थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में अकेले लड़ने उतरी कांग्रेस को महज 2.33 प्रतिशत वोट और सिर्फ 2 सीटों से संतोष करना पड़ा था। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या आपसी कलह और कमजोर संगठन के साथ कांग्रेस यूपी चुनाव में कोई चमत्कार कर पाएगी या विपक्ष की राह और कमजोर होगी।



