15 साल का किला और BJP की घेराबंदी: क्या चौथी बार CM बन पाएंगी ममता दीदी?

Bengal Election News 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की वजह से आदर्श आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद कानून व्यवस्था की निरंतर धज्जियां उड़ रही हैं। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ता निरंकुश नजर आते हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उदंड कार्यकर्ताओं की लगाम कसने की बजाए दूसरों में खोट निकाल रही हैं। बार-बार ‘विक्टिम कार्ड’ खेलकर वह मतदाताओं की सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रही हैं।
चौथी बार वापसी की आस में टीएमसी
पिछले पंद्रह साल से वह बंगाल की सत्ता पर काबिज हैं। अब वह चौथी बार सीएम बनने के लिए रेस में शामिल हुई हैं। टीएमसी पर मजबूत पकड़ के कारण उन्हें पार्टी के भीतर से कोई बड़ी चुनौती नहीं मिल रही है। पार्टी के तमाम पुराने एवं वरिष्ठ नेता ममता दीदी की ‘हां’ में ‘हां’ मिलाने को मजबूर हैं। इस राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर जब तब बवाल पैदा हो रहा है।
उग्र भीड़ द्वारा कुछ न्यायिक अधिकारियों को कई घंटे तक बंधक बनाकर रखने का मामला अभी पूरी तरह से ठंडा नहीं पड़ा कि मुर्शिदाबाद में चुनाव प्रचार पर निकले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी के काफिले पर हमला किए जाने का मामला सामने आ चुका है। आरोप है कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की प्रचार टीम के साथ गाली-गलौच एवं धक्का-मुक्की की।
सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो से पता चलता है कि यदि सिक्योरिटी कवर नहीं होता तो अधीर रंजन के संग कोई अप्रिय घटना घट सकती थी। न्यायिक अधिकारियों से बदसलूकी के मामले का सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा था। जबकि अधीर रंजन के काफिले में धक्का-मुक्की होने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नाराजगी सामने आई है।
राहुल ने टीएमसी पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। दोनों घटनाएं इस राज्य में कानून व्यवस्था की बद से बदतर स्थिति का पुख्ता प्रमाण हैं। यह हालत तब है जब चुनाव आयोग के आदेश पर पुलिस-प्रशासन में थोक के भाव तबादले किए गए हैं। पश्चिम बंगाल में दो चरण में चुनाव होने हैं। चुनाव मैदान में सत्ताधारी टीएमसी के अलावा भाजपा, कांग्रेस, लेफ्ट व एआईएमआईएम जैसे दल अपनी किस्मत आजमाने उतरे हैं।
BJP और TMC के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं
भाजपा और टीएमसी के बीच की अदावत किसी से छिपी नहीं है। टीएमसी को भाजपा की ओर से कड़ी चुनौती मिल रही है। भगवा पार्टी ने बंगाल की कानून व्यवस्था के बहाने सीएम ममता बनर्जी की घेराबंदी कर रखी है। उन पर हर दिन जुबानी हमले किए जा रहे हैं। पंद्रह साल पहले लेफ्ट के अभेद किले को ध्वस्त कर ममता बनर्जी ने राज्य की सत्ता हासिल की थी। बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस आज सबसे खराब स्थिति में हैं।
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सत्ता से टीएमसी को उखाड़ फेंकने के लिए भाजपा ने अलग रणनीति बनाई है। वैसे देखा जाए तो बंगाल में कानून व्यवस्था को पटरी पर रखने में सरकार हमेशा असफल रही है। दरअसल टीएमसी के कार्यकर्ता आमतौर पर सत्ता के नशे में चूर होकर कानून को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आते हैं। टीएमसी के गलत कृत्यों की गूंज बेशक देश की शीर्ष अदालत में सुनाई दे या देश की राजधानी में, पार्टी मुखिया को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
आवेश में आकर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर जुबानी हमला शुरू कर देती हैं। ममता बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया है कि इस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश चल रही है। इस प्रकार के आरोप वह पूर्व में भी लगा चुकी हैं।



