बैंक लॉकर से कीमती सामान गायब होने पर कौन मुआवज़ा देता है, जानें क्या कहता है RBI का नियम

Bank Locker Rules RBI: हम सभी अपने गहने और कीमती दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं. घर के बजाय बैंक को ज्यादा महफूज माना जाता है. मगर उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आई एक हालिया घटना ने इस भरोसे को हिला कर रख दिया है. यहां एक महिला ने दावा किया है कि साल 2003 में उसने एसबीआई (SBI) के एक लॉकर में अपनी कीमती चीजें रखी थीं.

अब इतने सालों बाद जब उसने अपना लॉकर खोला तो अंदर का पूरा सामान गायब था. इस हैरान करने वाले मामले ने आम ग्राहकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो जाए तो क्या बैंक आपके नुकसान की पूरी भरपाई करेगा? आइए इस बारे में जानते हैं.

मुआवजे को लेकर क्या कहता है रिज़र्व बैंक?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लॉकर सुरक्षा के लिए कड़े दिशानिर्देश बनाए हैं. नियम के मुताबिक अगर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत या सुरक्षा में किसी चूक के कारण आपका सामान चोरी होता है तो इसकी पूरी जवाबदेही बैंक की होगी.

इस स्थिति में बैंक को हर्जाना देना पड़ता है. यह रकम लॉकर के सालाना किराये का सौ गुना तक हो सकती है. मान लीजिए आप लॉकर के लिए हर साल पांच हजार रुपये किराया चुकाते हैं तो बैंक आपको अधिकतम पांच लाख रुपये का ही भुगतान करेगा. इसका सीधा मतलब यह है कि बैंक आपके गायब हुए सामान की पूरी कीमत चुकाने के लिए बाध्य नहीं है.

किन हालात में बैंक नहीं लेगा जिम्मेदारी?

लॉकर को किसी इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह समझना एक बड़ी भूल हो सकती है. अगर लॉकर में रखे सामान का नुकसान किसी प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप या बाढ़ के कारण होता है तो बैंक कोई हर्जाना नहीं देगा. इसके अलावा आग लगने या इमारत गिरने जैसी घटनाओं में भी बैंक को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. केवल बैंक की लापरवाही साबित होने पर ही ग्राहक मुआवजे का हकदार होता है.

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सामान गायब होने पर तुरंत उठाएं ये कदम

अगर कभी लॉकर खोलने पर आपको सामान गायब मिले तो घबराने के बजाय तेजी से कानूनी कदम उठाएं. सबसे पहले बैंक मैनेजर को लिखित रूप में घटना की जानकारी दें. इसके तुरंत बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज करवाएं. अपनी शिकायत की रिसीविंग और लॉकर के इस्तेमाल से जुड़े सभी कागजात अपने पास सुरक्षित रखें. अगर बैंक प्रबंधन आपकी शिकायत पर कोई एक्शन नहीं लेता है तो आप बैंक के शिकायत निवारण सेल का दरवाजा खटखटा सकते हैं. वहां से भी न्याय न मिलने पर सीधा आरबीआई के लोकपाल के पास अपनी शिकायत दर्ज कराने का विकल्प आपके पास हमेशा मौजूद रहता है.

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